हिमाचल में नए
संस्थानों की आ रही बाढ़ के बीच वित्त विभाग ने सरकार से डिग्री कॉलेजों
में बैचलर इन एजूकेशन विषय पढ़ाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जता दी है। विभाग
ने इस विषय को शुरू करने की बजाय सामान्य स्नातक के विषयों पर जोर देने की
सिफारिश की है। विभाग ने तर्क दिया है कि इस विषय में पढ़ाई के बाद युवाओं
के लिए नौकरी के अवसर सीमित हो जाते हैं।
साथ ही प्रदेश में पहले से ही पर्याप्त संख्या
में बीएड कॉलेज चल रहे हैं। ऐसे में इस विषय को पढ़ाने से सरकार को खास
फायदा नहीं होगा। विभाग ने अपनी सिफारिश सरकार को भेज दी है। इस पर अब
सरकार फैसला लेगी। कुछ समय पहले उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के डिग्री
कॉलेजों में बैचलर इन एजूकेशन कोर्स शुरू करने की कवायद शुरू की।
प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया। शासन ने सुझाव के लिए फाइल वित्त विभाग को भेजी, लेकिन विभाग ने इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाने से इनकार कर दिया। विभागीय सूत्रों के अनुसार वित्त विभाग ने तर्क दिया कि कई अन्य विश्वविद्यालयों में भी इस कोर्स को चलाया गया, लेकिन वहां यह सफल नहीं रहा।
साथ ही बीएड करने के बाद युवाओं के पास टीचिंग के अलावा किसी अन्य नौकरी का स्कोप नहीं रहता, जबकि अगर वह सामान्य ग्रेजुएशन करने के बाद बीएड करें तो उनके पास नौकरी के ज्यादा अवसर रहते हैं। साथ ही यह भी दलील दी कि प्रदेश में पहले से ही पर्याप्त संख्या में बीएड कॉलेज खुले हुए हैं।
प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया। शासन ने सुझाव के लिए फाइल वित्त विभाग को भेजी, लेकिन विभाग ने इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाने से इनकार कर दिया। विभागीय सूत्रों के अनुसार वित्त विभाग ने तर्क दिया कि कई अन्य विश्वविद्यालयों में भी इस कोर्स को चलाया गया, लेकिन वहां यह सफल नहीं रहा।
साथ ही बीएड करने के बाद युवाओं के पास टीचिंग के अलावा किसी अन्य नौकरी का स्कोप नहीं रहता, जबकि अगर वह सामान्य ग्रेजुएशन करने के बाद बीएड करें तो उनके पास नौकरी के ज्यादा अवसर रहते हैं। साथ ही यह भी दलील दी कि प्रदेश में पहले से ही पर्याप्त संख्या में बीएड कॉलेज खुले हुए हैं।
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