राजेश मंढोत्रा। शिमला : क्या शिक्षकों की बैकडोर एसएमसी भर्ती के लिए झूठे बहाने बनाए जा रहे हैं? क्या 24 जुलाई 2018 को कैबिनेट मेें झूठे तर्क देकर एसएमसी भर्ती की मंजूरी ली गई? ये सवाल इसलिए क्योंकि जो तर्क इस भर्ती के लिए शिक्षा मंत्री दे रहे हैं, वो सही नहीं हैं।
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कुछ रोज पहले कहा था कि एसएमसी से इसलिए भर्ती करनी पड़ रही है, क्योंकि हमीरपुर चयन आयोग से भर्ती में ज्यादा वक्त लग रहा है। दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों में रिक्तियों को भरने की जल्दी है, क्योंकि इनमें रेगुलर टीचर नहीं जाते। दूसरी ओर, हमीरपुर आयोग का जवाब आंखें खोलने वाला है। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि देरी आयोग नहीं, बल्कि सरकार और शिक्षा विभाग के स्तर पर है। आयोग ज्यादा से ज्यादा 6 महीने में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पूरी कर सकता है। लेकिन इससे ज्यादा देरी शिक्षा विभाग खुद कर रहा है। विभाग रिक्वीजीशन देरी से भेजता है।बैच तो दूर, टेट सर्टिफिकेट भी एक्सपायर हो रहे
बैकडोर भर्तियों के कारण हालत ये है कि टीजीटी कैटेगिरी में जनरल कैटेगिरी के लिए तो बैच से नौकरी की उम्मीद लगभग टूट चुकी है। टेट पास करने के बाद भी 6 साल का समय लैप्स हो रहा है और ये सर्टिफिकेट भी एक्सपायर हो रहे हैं। टीजीटी आट्र्स में 1999, नॉन मेडिकल में 1998 और मेडिकल में 1999 का बैच जनरल के लिए चल रहा है। बीपीएल में यही बैच 2000 से 2003 के बीच है। एसएमसी जैसी भर्तियों से से बैच और पीछे जाएगा।हजार पद खाली 4000 पर हो रही नई भर्ती
हाईकोर्ट में स्कूलों की रिक्तियों को लेकर चल रहे केस में सुनवाई 29 अगस्त को है। इसमें जेबीटी बैचवाइज भर्ती का केस ईटीटी की वजह से क्लब हुआ है। इस कारण करीब 750 पदों वाली जेबीटी भर्ती भी फंसी हुई है। इसी केस में सरकार की ओर से दिए गए आंकड़े के अनुसार करीब 14,354 पद अभी खाली हैं। इनमें से इफेक्टिव पद करीब 10 हजार हैं। इनमें से भी 4000 पदों को भरने के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है।“इस बार की एसएमसी भर्ती प्रक्रिया पहले से भिन्न है। हम इन शिक्षकों को अनुबंध या किसी स्थायी नीति का प्रावधान नहीं दे रहे हैं। रेगुलर भर्ती से इन्हें हटना होगा। इसलिए इस भर्ती से बैचवाइज या रेगुलर भर्तियों पर कोई असर नहीं होगा।”
-डॉ. अरुण शर्मा, शिक्षा सचिव