हमीरपुर – प्रदेश पदोन्नत स्कूल प्रवक्ता संघ सरकार के
एसएमसी के आधार पर अध्यापकों के पदों को भरने के निर्णय का विरोध करता है।
संघ की कोर कमेटी अध्यक्ष केवल ठाकुर एवं प्रदेश महासचिव यशवीर जम्वाल ने
कहा कि वर्ष 2006 से लेकर अब तक विभिन्न अस्थायी नीतियों के तहत नियुक्त
लगभग 16 हजार अध्यापक आज भी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
उन्हें विभाग
में 12 वर्ष की सेवाएं देने के पश्चात भी इस बात की चिंता सता रही है कि न
जाने कब उन्हें शिक्षा विभाग से अलविदा कर दिया जाए। इस प्रकार की
नियुक्तियों में बहुत सी कमियां रह जाती हैं। ये नियुक्तियां अधिकांश
दूरदराज के क्षेत्रों में ही की जाती हैं। इनमें आरक्षण के रोस्टर का ध्यान
नहीं रखा जाता और अधिकतर नियुक्तियां स्थानीय तौर पर होने के कारण
वरिष्ठता, योग्यता और प्रतिभा को दरकिनार करने के आरोप लगते हैं तथा सभी
पात्र व्यक्तियों को एक समान मौका नहीं मिलता। इस प्रकार की नियुक्तियों के
लिए भर्ती और पदोन्नति नियमों का कोई प्रावधान नहीं है। अतः जब इन नियमों
में छूट देकर ऐसे अध्यापकों को नियमित किया जाता है, तो ये अध्यापक अपनी
वरिष्ठता या सेवा लाभों के लिए आए दिन संघर्षरत रहते हैं या न्यायालय का
दरवाजा खटखटाते रहते हैं। यदि विभाग दोबारा से ऐसी भर्तियां करता है, तो
अध्यापकों का एक और ऐसा वर्ग तैयार हो जाएगा, जिसे छात्रों से ज्यादा अपने
भविष्य की चिंता सताएगी। इससे प्रदेश में शिक्षा का स्तर गिरेगा। अतः संघ
के पदाधिकारियों में प्रदेश उपाध्यक्ष हरिमन शर्मा, विक्रम वर्मा प्रधान
जिला बिलासपुर, संजीव शर्मा प्रधान ऊना मोहन लाल, प्रधान कांगड़ा प्रदीप
धीमान, प्रदेश प्रवक्ता विकास धीमान, महासचिव जिला हमीरपुर रविदास, वरिष्ठ
उपाध्यक्ष संदीप डढवाल, विनोद शर्मा अजय नंदा, प्रीतम कौशल, अनिल धीमान,
दलजीत चौहान का कहना है कि शिक्षा विभाग में भर्ती और पदोन्नति नियमों के
तहत ही स्थायी आधार पर अध्यापकों की नियुक्ति की जाए।