हिमाचल प्रदेश में स्कूल का खराब रिजल्ट आने पर राज्य सरकार ने 38 पीजीटी
शिक्षकों की इंक्रीमेंट यानी वार्षिक वेतन वृद्धि रोक दी है. सरकार ने खराब रिजल्ट की रिपोर्ट मांगी थी, जिसके बाद कम रिजल्ट देने वाले
शिक्षकों पर गाज गिरी है. नाराज शिक्षकों ने शिमला
में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज से मुलाकात
की. शिक्षकों ने उनसे इस फैसले को वापिस लेने की मांग की है. इन शिक्षकों
ने राज्य सरकार के इस फैसले को तुगलकी फरमान बताया है.
'शिक्षक नहीं बल्कि शिक्षा नीति दोषी'
पीजीटी शिक्षक संघ के अध्यक्ष चितरंजन काल्टा का कहना है कि खराब रिजल्ट के
लिए शिक्षक नहीं, बल्कि शिक्षा नीति जिम्मेदार है. सरकार ने नो रिटेंशन
पॉलिसी के तहत पहली से लेकर आठवीं तक बच्चों को फेल न करने के आदेश दे रखे
हैं.
उन्होंने कहा कि आठवीं कक्षा पास करके आना वाला छात्र नौवीं कक्षा में
बैठने लायक नहीं होता. कई स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं. इन
दिक्कतों के चलते शिक्षकों को अपने विषय के अलावा दूसरे विषय भी पढ़ाने पड़
रहे हैं. उन्होंने कहा कि बच्चों के फेल होने के पीछे शिक्षकों का दोष
नहीं है और अगर सरकार हालात बदलना चाहती है तो नो रिटेंशन पॉलिसी को ही
बदलना होगा.