शिमला – 250 करोड़ के
स्कॉलरशिप घोटाले में निजी शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ शिक्षा विभाग के
कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है। सीबीआई जांच में
सामने आया है कि शिक्षा विभाग में छात्रों के लिए तैयार किए गए ई-पास
पोर्टल से भी छेड़खानी की गई है।
जानकारी के मुताबिक इस पोर्टल में प्रदेश
के दो लाख 90 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। सीबीआई द्वारा शिमला में चल
रही जांच में प्रदेश सरकार द्वारा पहली जांच रिपोर्ट में इस बात का जिक्र
किया गया है। इसे देखते हुए सीबीआई की टीम उच्च शिक्षा विभाग के ऐसे
अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ करेगी, जिन्होंने पोर्टल के साथ
छेड़खानी की है। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी की टीम उच्च शिक्षा विभाग
की स्कॉलरशिप ब्रांच में सेवाएं दे रहे अधिकारी और कर्मचारियों से कभी भी
पूछताछ कर सकती है। इसके साथ ही सीबीआई ने शिक्षा विभाग से वर्ष 2013 से
लेकर 2017 तक का पूरा ब्यौरा मांगा है, जिसके आधार पर जांच आगे बढ़ेगी। इस
मामले में कई बडे़ शिक्षण संस्थान जांच के दायरे में हैं। जानकारी के
मुताबिक 80 फीसदी छात्रवृत्ति का बजट सिर्फ निजी संस्थानों में बांटा गया,
जबकि सरकारी संस्थानों को छात्रवृत्ति के बजट का मात्र 20 फीसदी हिस्सा
मिला। बीते चार साल में 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19 हजार 915 को
सिर्फ चार मोबाइल फोन नंबर से जुड़े बैंक खातों में छात्रवृत्ति राशि जारी
कर दी गई। इसी तरह 360 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति चार ही बैंक खातों में
ट्रांसफर की गई। 5729 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में तो आधार नंबर
का प्रयोग ही नहीं किया गया है।
शिक्षा विभाग से मांगा 2772 संस्थानों का ब्यौरा
स्कॉलरशिप घोटाले में
केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने उच्च शिक्षा विभाग से 2772 शिक्षण
संस्थानों का ब्यौरा मांगा है। हालांकि सीबीआई ने मात्र 22 शिक्षण
संस्थानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच कर रही है, लेकिन बीते दिनों
प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद जांच एजेंसी ने कार्रवाई तेज कर दी है। इस
मामले पर आगामी 14 नवंबर को हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है।