एक टीजीटी की पीजीटी पद पर लगभग 14 से 15 वर्षों में तथा हेडमास्टर पद पर 28 से 30 वर्षों की सेवा के पश्चात पदोन्नति होती है, लेकिन विभाग को इन अध्यापकों की पदोन्नति की कोई सुध नहीं है। प्रदेश में टीजीटी वर्ग की संख्या अधिक है और पदोन्नति के अवसर सीमित हैं।
सीमित पदोन्नति अवसर होने के कारण दशकों के सेवाकाल के बाद मिलने वाली पदोन्नति के यूं लटकने के कारण टीजीटी वर्ग में भारी रोष और हताशा है। अप्रैल से इस पदोन्नति की आस लगाए बैठे टीजीटी शिक्षक आधा सत्र बीत जाने के बाद भी पदोन्नति न मिलने से मायूस हैं।
उन्होंने कहा कि विभिन्न कारणों से कुछ अध्यापकों के खराब रिजल्ट पर उनकी इंक्रीमेंट (सालाना वेतनवृद्धि) रोकने में विभाग इस कद्र व्यस्त हो गया है कि उन रूटीन में होनी वाली पदोन्नतियों को भी भूल गया है, जिनका इंतजार शिक्षक पिछले कई दशकों से बेसब्री से कर रहे हैं।
टीजीटी आर्ट्स एसोसिएशन ने शिक्षामंत्री सुरेश भारद्वाज से मांग की है कि टीजीटी से पीजीटी प्रमोशन के आदेश जारी करने के निर्देश विभाग को जल्द दिए जाएं और दशकों से पदोन्नति की राह देख रहे टीजीटी वर्ग को राहत प्रदान की जाए।