एचपीयूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाला शिक्षक अब जब तक चाहे तब तक कहीं दूसरी
जगह अपनी सेवाएं दे सकता हैं। इस अजब गजब नियम के चलते तो एचपीयू को कोई
फायदा हो रहा है और ही छात्रों को पढ़ाने के लिए कोई विकल्प एचपीयू के पास
बचा हैं। यही, नहीं उक्त शिक्षक निजी यूनिवर्सिटी में अपनी सेवाएं देने के
बाद दोबारा से यूनिवर्सिटी में अपने पद पर ज्वाइन कर सकता हैं। ऐसे में
एचपीयू के इस अजब गजब नियम के कारण छात्रों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।
खास बात यह है कि शिक्षक जब तक चाहे तब तक अपनी सेवाएं प्राइवेट
यूनिवर्सिटी में दे सकता हैं। ऐसे में उनके पद को तो यूनिवर्सिटी प्रशासन
भर सकता हैं और ही उनके स्थान पर पढ़ाने के लिए किसी अन्य शिक्षक को रख
सकता हैं।
शिक्षकों की सेवाओं का विवि को कोई लाभ नहीं
अवकाशपर जाने वाले शिक्षकों की सेवाओं का एचपीयू को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। उल्टा यूनिवर्सिटी को इससे नुकसान हो रहा है। शिक्षकों के अनुभव का निजी यूनिवर्सिटियों को ही फायदा मिल रहा हैं। एचपीयू ने वर्ष 2014 में ऑर्डिनेंस में शिक्षकों चुनाव लड़ने को लेकर कई तरह के नियम लाए थे। जबकि शिक्षक के निजी यूनिवर्सिटी में सेवाएं देने बारे में किसी तरह के नियम में बदलाव नहीं किया गया हैं। ऐसे में छात्रों को इसका सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा हैं।
दो शिक्षक अभी अवकाश पर, निजी विवि में नौकरी
वर्तमानमें एचपीयू से दो शिक्षक अवकाश लेकर प्राइवेट यूनिवर्सिटी में नौकरी कर रहे हैं। इनमें से एक फिजिक्स विभाग के प्रो. महावीर सिंह हैं। ये वर्तमान में आईसी यूनिवर्सिटी बद्दी में बतौर वीसी कार्यरत हैं। इसी तरह डॉ. एसके बंसल महाराजा अग्रसेन यूनिवर्सिटी के वीसी पद पर सेवाएं दे रहे हैं। ये एचपीयू में एमटीए विभाग के निदेशक के पद पर तैनात थे।
इस तरह के नियम बनाए हैं
{एचपीयूमें पढ़ाने वाला शिक्षक किसी भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में डेपुटेशन पर जाकर पढ़ा सकता हैं।
{इसके लिए कोई लिमिट नहीं रखी हैं, जब तक शिक्षक चाहे निजी विवि में पढ़ा सकता हैं।
{एचपीयू उक्त शिक्षक को सैलरी नहीं देगा, जबकि जब वह यूनिवर्सिटी को फिर से ज्वाइन करता है तो सेवानिवृत अन्य तरह के सभी तरह के लाभ उसे मिलते हैं।
{शिक्षक की पोस्ट खाली रहती है। उनकी जगह किसी अन्य शिक्षक को नहीं रख सकते हैं।
{जिस विषय के वे शिक्षक हैं, उस विषय को पढ़ाने के लिए विवि के पास कोई विकल्प नहीं रहता हैं।
^शिक्षक अभी डेपुटेशन पर जा सकता हैं। हम मानते हैं इससे विवि को नुकसान हो रहा है। जबकि ये यूनिवर्सिटी की ओर से पहले ही तय किए गए नियम हैं। शिक्षक अवकाश लेकर ही किसी अन्य यूनिवर्सिटी में जाता हैं। इसके लिए उसे सैलरी नहीं मिलती हैं। जब वह दोबारा एचपीयू ज्वाइन करता हैं, तभी उसे लाभ मिलते हैं। प्रो.कंवलजीत सिंह, अध्यक्ष, शिक्षक संघ हपुटवा एचपीयू
^शिक्षकों के इस तरह से निजी यूनिवर्सिटी में डेपुटेशन पर जाने से स्टूडेंट को नुकसान होता हैं। कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए ऐसे कोई नियम नहीं है, जबकि शिक्षकों के लिए यह नियम बनाए गए हैं। ऐसे में विवि प्रशासन को इन नियमों में बदलाव करने चाहिए। तभी विवि में छात्रों को फायदा होगा। तेजरामशर्मा, अध्यक्ष, ऑफिसर एसोसिएशन एचपीयू
शिक्षकों की सेवाओं का विवि को कोई लाभ नहीं
अवकाशपर जाने वाले शिक्षकों की सेवाओं का एचपीयू को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। उल्टा यूनिवर्सिटी को इससे नुकसान हो रहा है। शिक्षकों के अनुभव का निजी यूनिवर्सिटियों को ही फायदा मिल रहा हैं। एचपीयू ने वर्ष 2014 में ऑर्डिनेंस में शिक्षकों चुनाव लड़ने को लेकर कई तरह के नियम लाए थे। जबकि शिक्षक के निजी यूनिवर्सिटी में सेवाएं देने बारे में किसी तरह के नियम में बदलाव नहीं किया गया हैं। ऐसे में छात्रों को इसका सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा हैं।
दो शिक्षक अभी अवकाश पर, निजी विवि में नौकरी
वर्तमानमें एचपीयू से दो शिक्षक अवकाश लेकर प्राइवेट यूनिवर्सिटी में नौकरी कर रहे हैं। इनमें से एक फिजिक्स विभाग के प्रो. महावीर सिंह हैं। ये वर्तमान में आईसी यूनिवर्सिटी बद्दी में बतौर वीसी कार्यरत हैं। इसी तरह डॉ. एसके बंसल महाराजा अग्रसेन यूनिवर्सिटी के वीसी पद पर सेवाएं दे रहे हैं। ये एचपीयू में एमटीए विभाग के निदेशक के पद पर तैनात थे।
इस तरह के नियम बनाए हैं
{एचपीयूमें पढ़ाने वाला शिक्षक किसी भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में डेपुटेशन पर जाकर पढ़ा सकता हैं।
{इसके लिए कोई लिमिट नहीं रखी हैं, जब तक शिक्षक चाहे निजी विवि में पढ़ा सकता हैं।
{एचपीयू उक्त शिक्षक को सैलरी नहीं देगा, जबकि जब वह यूनिवर्सिटी को फिर से ज्वाइन करता है तो सेवानिवृत अन्य तरह के सभी तरह के लाभ उसे मिलते हैं।
{शिक्षक की पोस्ट खाली रहती है। उनकी जगह किसी अन्य शिक्षक को नहीं रख सकते हैं।
{जिस विषय के वे शिक्षक हैं, उस विषय को पढ़ाने के लिए विवि के पास कोई विकल्प नहीं रहता हैं।
^शिक्षक अभी डेपुटेशन पर जा सकता हैं। हम मानते हैं इससे विवि को नुकसान हो रहा है। जबकि ये यूनिवर्सिटी की ओर से पहले ही तय किए गए नियम हैं। शिक्षक अवकाश लेकर ही किसी अन्य यूनिवर्सिटी में जाता हैं। इसके लिए उसे सैलरी नहीं मिलती हैं। जब वह दोबारा एचपीयू ज्वाइन करता हैं, तभी उसे लाभ मिलते हैं। प्रो.कंवलजीत सिंह, अध्यक्ष, शिक्षक संघ हपुटवा एचपीयू
^शिक्षकों के इस तरह से निजी यूनिवर्सिटी में डेपुटेशन पर जाने से स्टूडेंट को नुकसान होता हैं। कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए ऐसे कोई नियम नहीं है, जबकि शिक्षकों के लिए यह नियम बनाए गए हैं। ऐसे में विवि प्रशासन को इन नियमों में बदलाव करने चाहिए। तभी विवि में छात्रों को फायदा होगा। तेजरामशर्मा, अध्यक्ष, ऑफिसर एसोसिएशन एचपीयू