जागरण संवाददाता, हमीरपुर : विधानसभा चुनाव प्रचार में लोगों के घरों
में दस्तक दे रहे नेताओं को उनके साथ किए वादों की याद दिला रहे हैं।
2012 के कांग्रेस पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र में बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया था। हर घर से एक को सरकारी नौकरी देने का भी वादा किया था, लेकिन यह वादा पूरा न होने पर पढ़े-लिखे युवाओं में रोष पनप रहा है।
शारीरिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार, सदस्य पुरुषोत्तम लाल का कहना है कि शिक्षा विभाग में उन्हें अभी तक बैचवाइज भी नौकरी नहीं मिल पाई है। प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में शारीरिक शिक्षा का ढांचा तहस-नहस होने जा रहा है। इस समय प्रदेश भर के स्कूलों में करीब 3200 शारीरिक शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं और स्कूलों में प्रात:कालीन सभा करवाने के लिए अध्यापकों की कमी खल रही है। चुनाव के दिन नेताओं को वोट मांगने की याद आती है और फिर उसके बाद जब मत हासिल कर लेते हैं तो वादा भूल जाते हैं। उन्होंने बताया कि हर विभाग का आकलन किया जाए तो फिर सब सामने आ जाएगा। शारीरिक शिक्षक संघ के सदस्य सतीश शर्मा का कहना है कि नेताओं को चुनाव के दौरान ही घोषणा पत्र की याद आती है और उसके बाद वह उस चुनाव घोषणा पत्र को रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं, जिसके चलते शारीरिक शिक्षकों के हजारों पद खाली पड़े हैं। जो पार्टी इस बार शारीरिक शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए चुनावी घोषणा पत्र में जिक्र करेगी, उसी पार्टी व संगठन को सहयोग दिया जाएगा अन्यथा मत का प्रयोग नहीं करेंगे।
2012 के कांग्रेस पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र में बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया था। हर घर से एक को सरकारी नौकरी देने का भी वादा किया था, लेकिन यह वादा पूरा न होने पर पढ़े-लिखे युवाओं में रोष पनप रहा है।
शारीरिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार, सदस्य पुरुषोत्तम लाल का कहना है कि शिक्षा विभाग में उन्हें अभी तक बैचवाइज भी नौकरी नहीं मिल पाई है। प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में शारीरिक शिक्षा का ढांचा तहस-नहस होने जा रहा है। इस समय प्रदेश भर के स्कूलों में करीब 3200 शारीरिक शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं और स्कूलों में प्रात:कालीन सभा करवाने के लिए अध्यापकों की कमी खल रही है। चुनाव के दिन नेताओं को वोट मांगने की याद आती है और फिर उसके बाद जब मत हासिल कर लेते हैं तो वादा भूल जाते हैं। उन्होंने बताया कि हर विभाग का आकलन किया जाए तो फिर सब सामने आ जाएगा। शारीरिक शिक्षक संघ के सदस्य सतीश शर्मा का कहना है कि नेताओं को चुनाव के दौरान ही घोषणा पत्र की याद आती है और उसके बाद वह उस चुनाव घोषणा पत्र को रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं, जिसके चलते शारीरिक शिक्षकों के हजारों पद खाली पड़े हैं। जो पार्टी इस बार शारीरिक शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए चुनावी घोषणा पत्र में जिक्र करेगी, उसी पार्टी व संगठन को सहयोग दिया जाएगा अन्यथा मत का प्रयोग नहीं करेंगे।