ऐसा लगता है कि हमें अज्ञानियों से प्रेम है. इसके सबूत उनकी टिप्पणियों और नीतियों के रूप में बिखरे पड़े हैं जिन्हें हम संसद और विधानसभाओं में चुनकर भेजते हैं. उन्हें कुछ खबर नहीं कि शिक्षा क्या है. एक शिक्षक के काम को घंटों में नहीं बांधा जा सकता : पढ़ाने से पहले तैयारी भी जरूरी होती है.