जागरण संवाददाता, शिमला : सीएंडवी के तहत होने वाली शास्त्री बैचवाइज
भर्तियों में बैच को लेकर पेंच उलझता दिखाई दे रहा है। अभी तक अभ्यर्थी यह
नहीं समझ पाए हैं कि जिस वर्ष उन्होंने परीक्षा उत्तीर्ण की है, विभाग उसे
भर्ती का आधार मानेगा अथवा जिस वर्ष में उन्होंने श्रेणी सुधार किया है, उस
वर्ष का बैच माना जाएगा।
बैचवाइज भर्ती के इंतजार में बैठे हजारों युवा असमंजस की स्थिति में हैं। ऐसे में कुछ अभ्यर्थी न्यायालय जाने का मन बना रहे हैं।
पहले जब विद्यार्थियों ने शास्त्री की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, उन दिनों 50 प्रतिशत की अहर्ता शर्त शास्त्री लगने के लिए नहीं थी, लेकिन बाद में सीएंडवी के नियमों में फेरबदल किया गया। इसमें 50 प्रतिशत की शर्त के साथ टेट की अनिवार्यता शास्त्री बनने के लिए लगाई गई। पासआउट अभ्यर्थियों ने कहा कि उस समय सिलेबस का युक्तिकरण नहीं किया गया था। इसके साथ परीक्षा में हार्ड मार्किंग के चलते कुछ अभ्यर्थी 50 प्रतिशत नंबरों से पास हो पाते थे, लेकिन बाद में सिलेबस का युक्तिकरण किया गया और मार्किंग प्रक्रिया में भी सुधार किया गया, जब इन नियमों में संशोधन किया गया, तो इसके साथ ही सभी अभ्यर्थियों को श्रेणी सुधार का मौका भी दिया गया। यह मौके वर्ष 2010 के बाद देने से उनकी श्रेणी सुधार वर्ष और पासआउट वर्ष में भारी अंतर आ गया और वह बैचवाइज चल रही भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो गए। इन पुराने अभ्यर्थियों के पास 50 प्रतिशत सहित टेट का प्रमाणपत्र तो है, लेकिन इनको भय सता रहा है कि इस बार जारी भर्ती प्रक्रिया में उनका बैचवाइज नंबर न आए। शिक्षा विभाग ने भी अब तक कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए हैं। इसके आधार पर वह बैच के बारे में अपनी आकांशाओं का निराकरण कर पाएं।
शास्त्री के वर्ष 2005 के पहले पासआउट अभ्यर्थियों की अभी भी काफी संख्या है जो नए सीएंडवी नियमों के तहत होने वाली भर्तियों की सभी अर्हता तो पूरा करते हैं, लेकिन उनके श्रेणी सुधार वर्ष एवं डिग्री पासआउट वर्ष में भारी अंतर है।
पासआउट वर्ष माना जाए भर्तियों का आधार
शास्त्री बेरोजगार संघ के अध्यक्ष लेखराज शर्मा ने कहा कि सभी अभ्यर्थी शिक्षा विभाग से आस लगाए हैं कि इन भर्तियों में असमंजस की स्थिति को दूर किया जाए व बैचवाइज भर्तियों का आधार पासआउट वर्ष माना जाए।
शिक्षा विभाग के फैसले का इंतजार
वर्ष 2004 में शास्त्री उत्तीर्ण करने वाले डॉ. विरेंद्र सिंह ने बताया कि परीक्षा उत्तीण के समय श्रेणी सुधार का कोई मौका नहीं दिया जाता था ऐसे में उनके श्रेणी सुधार व पासआउट वर्ष में करीब दस साल का अंतर पड़ गया है। ऐसे में वह बैचवाइज भर्ती के लिए दस साल देरी से मौका मिलेगा। दुष्यंत शर्मा व जितेंद्र शर्मा ने कहा कि जो वर्ष 2010 के बाद पासआउट हैं, वह आसानी से भर्तियों में चयनित हो जाएंगे। अब सभी को इस संदर्भ में शिक्षा विभाग की ओर से लिए जाने वाले निर्णय का इंतजार है।
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC
बैचवाइज भर्ती के इंतजार में बैठे हजारों युवा असमंजस की स्थिति में हैं। ऐसे में कुछ अभ्यर्थी न्यायालय जाने का मन बना रहे हैं।
पहले जब विद्यार्थियों ने शास्त्री की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, उन दिनों 50 प्रतिशत की अहर्ता शर्त शास्त्री लगने के लिए नहीं थी, लेकिन बाद में सीएंडवी के नियमों में फेरबदल किया गया। इसमें 50 प्रतिशत की शर्त के साथ टेट की अनिवार्यता शास्त्री बनने के लिए लगाई गई। पासआउट अभ्यर्थियों ने कहा कि उस समय सिलेबस का युक्तिकरण नहीं किया गया था। इसके साथ परीक्षा में हार्ड मार्किंग के चलते कुछ अभ्यर्थी 50 प्रतिशत नंबरों से पास हो पाते थे, लेकिन बाद में सिलेबस का युक्तिकरण किया गया और मार्किंग प्रक्रिया में भी सुधार किया गया, जब इन नियमों में संशोधन किया गया, तो इसके साथ ही सभी अभ्यर्थियों को श्रेणी सुधार का मौका भी दिया गया। यह मौके वर्ष 2010 के बाद देने से उनकी श्रेणी सुधार वर्ष और पासआउट वर्ष में भारी अंतर आ गया और वह बैचवाइज चल रही भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो गए। इन पुराने अभ्यर्थियों के पास 50 प्रतिशत सहित टेट का प्रमाणपत्र तो है, लेकिन इनको भय सता रहा है कि इस बार जारी भर्ती प्रक्रिया में उनका बैचवाइज नंबर न आए। शिक्षा विभाग ने भी अब तक कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए हैं। इसके आधार पर वह बैच के बारे में अपनी आकांशाओं का निराकरण कर पाएं।
शास्त्री के वर्ष 2005 के पहले पासआउट अभ्यर्थियों की अभी भी काफी संख्या है जो नए सीएंडवी नियमों के तहत होने वाली भर्तियों की सभी अर्हता तो पूरा करते हैं, लेकिन उनके श्रेणी सुधार वर्ष एवं डिग्री पासआउट वर्ष में भारी अंतर है।
पासआउट वर्ष माना जाए भर्तियों का आधार
शास्त्री बेरोजगार संघ के अध्यक्ष लेखराज शर्मा ने कहा कि सभी अभ्यर्थी शिक्षा विभाग से आस लगाए हैं कि इन भर्तियों में असमंजस की स्थिति को दूर किया जाए व बैचवाइज भर्तियों का आधार पासआउट वर्ष माना जाए।
शिक्षा विभाग के फैसले का इंतजार
वर्ष 2004 में शास्त्री उत्तीर्ण करने वाले डॉ. विरेंद्र सिंह ने बताया कि परीक्षा उत्तीण के समय श्रेणी सुधार का कोई मौका नहीं दिया जाता था ऐसे में उनके श्रेणी सुधार व पासआउट वर्ष में करीब दस साल का अंतर पड़ गया है। ऐसे में वह बैचवाइज भर्ती के लिए दस साल देरी से मौका मिलेगा। दुष्यंत शर्मा व जितेंद्र शर्मा ने कहा कि जो वर्ष 2010 के बाद पासआउट हैं, वह आसानी से भर्तियों में चयनित हो जाएंगे। अब सभी को इस संदर्भ में शिक्षा विभाग की ओर से लिए जाने वाले निर्णय का इंतजार है।
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