शिमला। हिमाचल प्रदेश में 1688 अप्रशिक्षित
शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ गई है। ये अप्रशिक्षित शिक्षक सरकारी और
निजी स्कूलों में पढ़ाते हैं। इनकी नौकरी पर मंडराने वाले संकट के पीछे और
कोई कारण नहीं, प्रिंसिपलों की लेटलतीफी है।
दरअसल डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन के लिए आवेदन करने वाले इन शिक्षकों की वेरिफिकेशन स्कूल प्रिंसिपलों की लेटलतीफी के कारण नहीं हो सकी है। स्कूल प्रिंसिपलों को ऑनलाइन ही यह वेरिफिकेशन करनी है लेकिन उनकी सुस्त कार्यप्रणाली के चलते अप्रशिक्षित शिक्षकों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने प्रिंसिपलों को पत्र जारी कर हर हालात में 25 नवंबर तक वेरिफिकेशन करने के आदेश जारी किए हैं। इस तारीख तक वेरिफिकेशन नहीं हुआ तो इन शिक्षकों की नौकरी का जाना तय माना गया है।
प्राइमरी कक्षाएं पढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन (डीएलएड) करना अनिवार्य किया है। 31 मार्च 2019 के बाद सरकारी और निजी स्कूलों में डीएलएड किए बिना कोई भी शिक्षक प्राथमिक कक्षाओं को नहीं पढ़ा सकेगा।
दरअसल डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन के लिए आवेदन करने वाले इन शिक्षकों की वेरिफिकेशन स्कूल प्रिंसिपलों की लेटलतीफी के कारण नहीं हो सकी है। स्कूल प्रिंसिपलों को ऑनलाइन ही यह वेरिफिकेशन करनी है लेकिन उनकी सुस्त कार्यप्रणाली के चलते अप्रशिक्षित शिक्षकों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने प्रिंसिपलों को पत्र जारी कर हर हालात में 25 नवंबर तक वेरिफिकेशन करने के आदेश जारी किए हैं। इस तारीख तक वेरिफिकेशन नहीं हुआ तो इन शिक्षकों की नौकरी का जाना तय माना गया है।
प्राइमरी कक्षाएं पढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन (डीएलएड) करना अनिवार्य किया है। 31 मार्च 2019 के बाद सरकारी और निजी स्कूलों में डीएलएड किए बिना कोई भी शिक्षक प्राथमिक कक्षाओं को नहीं पढ़ा सकेगा।