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टीचर सरप्लस, तो रिजल्ट खराब क्यों, शिमला के तीन ब्लॉक में स्टडी करवाएगा शिक्षा विभाग

 हिमाचल के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और लर्निंग आउटकम पर पहली बार एक नई स्टडी होगी। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक घनश्याम चंद ने एक नया प्रयोग करने का फैसला लिया है।

प्रारंभिक शिक्षा विभाग शिमला शहर के तीन ब्लॉक्स कुसुम्पटी, शिमला शहरी और मशोबरा में यह स्टडी करवाएगा कि जिन स्कूलों में टीचर पूरे हैं या सरप्लस हैं, वहां रिजल्ट अच्छा क्यों नहीं है। शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ शिक्षकों की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में यह स्टडी एक पायलट प्रोजेक्ट की तरह होगी। इस समीक्षा के लिए निदेशालय से ही कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। यदि पायलट आधार का यह प्रयोग सफल रहा तो अन्य जिलों में भी इसे लागू करेंगे। इस स्टडी में यह भी देखेंगे कि बच्चों का लर्निंग स्टैंडर्ड कैसा है, टीचिंग प्रैक्टिस किस स्तर की है और रिजल्ट क्या है। प्रारंभिक शिक्षा की कक्षाओं में बेशक बच्चों को फेल नहीं करते, लेकिन मूल्यांकन शीट बाकायदा तैयार होती है।

ग्रामीण क्षेत्रों या दूरदराज के क्षेत्रों में इस तरह का सर्वे करें, तो शिक्षकों का कहना होता है कि टीचर पूरे नहीं हैं, इसलिए शिमला शहर के नजदीक के ब्लॉकों में यह स्टडी पहले होगी। शहर के आसपास के स्कूलों में स्टाफ हमेशा पूरा रहता है और अधिकांश स्कूलों में स्टूडेंट रेशो से ज्यादा ही रहता है। नई सरकार ने शहरी क्षेत्रों से सरप्लस स्टाफ को उठाकर ग्रामीण क्षेत्रों में भेजने के लिए युक्तिकरण की प्रक्रिया बनाने को भी कहा है। हालांकि इसके अनुसार अभी टीचर्स के तबादले नहीं हुए हैं। यही कारण है कि यह स्टडी एक नया आधार भी दे सकती है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक घनश्याम चंद ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में क्योंकि शिक्षक पूरे होते हैं, इसलिए यहां लर्निंग आउटकम पर पहले सर्वे होना चाहिए। एक डेडीकेटेड टीम से यह काम पूरा करवाएंगे। यदि प्रयोग सफल रहा, तो अन्य जिलों में भी इसे लागू करेंगे और रिपोर्ट के आधार पर बाकी कदम उठाए जाएंगे।

बोर्ड रिजल्ट पर मांगी है रिपोर्ट

उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक अमरजीत शर्मा ने भी स्कूल शिक्षा बोर्ड से 10वीं और 12वीं के रिजल्ट की कंपैरेटिव शीट मांग रखी है। इस लिस्ट के आने के बाद जिन स्कूलों में रिजल्ट 25 फ़ीसदी से कम रहा है या जिन विषयों में रिजल्ट बेहद खराब रहा है, उन स्कूलों में शिक्षकों की जिम्मेदारी तय होगी। स्कूल शिक्षा बोर्ड से यह डिटेल आने के बाद इसे उच्च शिक्षा विभाग खुद देखेगा। एससीईआरटी सोलन से भी कुछ इनपुट लिया जा सकता है। उसके बाद राज्य सरकार को आगामी कार्रवाई के लिए यह मामला भेजा जा रहा है।

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