हिमाचल प्रदेश में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है। इसकी मुख्य वजह डिप्टी प्रिंसिपल ऑफ एजुकेशन (डीपीई) के पदों का शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता के पदों में विलय किया जाना बताया जा रहा है। इस प्रशासनिक फैसले के बाद पदोन्नति कोटे के तहत कोई भी पद रिक्त नहीं बचा है, जिससे लंबे समय से प्रमोशन की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों में गहरी नाराजगी है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में 150 से अधिक डीपीई पदों को मर्ज कर दिया गया है। इसके चलते शारीरिक शिक्षा अध्यापकों के लिए पदोन्नति के रास्ते बंद हो गए हैं। इतना ही नहीं, शारीरिक शिक्षा से जुड़ी सैकड़ों नई भर्तियों की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है और मामला न्यायालय में लंबित है।
शिक्षकों में असंतोष
शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ का कहना है कि सरकार को नए पद सृजित करने चाहिए थे, लेकिन इसके बजाय पहले से स्वीकृत डीपीई पदों को ही समाप्त कर दिया गया। इससे वरिष्ठ और योग्य शिक्षकों को पदोन्नति का अवसर नहीं मिल पा रहा है। संघ का दावा है कि प्रदेश के 400 से अधिक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में न तो डीपीई पद हैं और न ही शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता के पद, जिससे शारीरिक शिक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है।
सरकार से समाधान की मांग
शिक्षक संगठनों ने सरकार से डीपीई पदों को फिर से बहाल करने, नए पद सृजित करने और पदोन्नति प्रक्रिया को शीघ्र शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।
विभाग का पक्ष
शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया है कि इस पूरे मामले को सरकार के संज्ञान में लाया गया है और शिक्षकों के हित में जल्द ही उचित निर्णय लेने पर विचार किया जा रहा है।
यह मुद्दा न केवल शारीरिक शिक्षा शिक्षकों के करियर से जुड़ा है, बल्कि प्रदेश के स्कूलों में खेल और शारीरिक गतिविधियों की गुणवत्ता पर भी सीधा असर डाल रहा है।