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अब वार्षिक परीक्षाओं से पहले नहीं होंगी शिक्षक संघों से बैठकें

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की अगले माह होने वाली वार्षिक परीक्षाओं से पहले बोर्ड अध्यक्ष और अधिकारियों की अध्यापक संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें नहीं होंगी। ये बैठकें अब जून और जुलाई में आयोजित की जाएंगी।

अभी तक वार्षिक परीक्षाओं से पहले फरवरी और मार्च में अध्यापक संघों के प्रतिनिधियों के साथ बोर्ड अध्यक्ष और अधिकारियों की बैठकें होती थीं। वार्षिक परीक्षाओं से ठीक पहले अध्यापक संघ के प्रतिनिधियों के बोर्ड को मिलने वाले सुझावों पर अमल कर पाना मुश्किल होता था।

बैठकों में लिए गए फैसले अगले शैक्षणिक सत्र में ही लागू हो पाते थे। ऐसे में अब बोर्ड ने वार्षिक परीक्षाओं से ठीक पहले बैठकें न करके शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में बैठकें करने का फैसला लिया है, जिससे बैठकों में लिए गए फैसलों को वार्षिक परीक्षा संचालन में लागू किया जा सके।

उधर, स्कूल शिक्षा बोर्ड सचिव डॉ हरीश गज्जू ने बताया कि बोर्ड अध्यापक संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें जून-जुलाई में करेगा।

बैठकों में लिए जाते हैं अहम फैसले
इन बैठकों में परीक्षा संचालन से संबंधित अहम फैसलों को लेकर सुझाव अध्यापक संघों से लिए जाते हैं। इसमें परीक्षा संचालन में अध्यापकों और बोर्ड को आने वाली परेशानियों के हल के लिए भी रूपरेखा तैयार की जाती है।

इसके अलावा वार्षिक परीक्षाओं के संबंध में ज्यादातर सुझाव पेपर सेटिंग को लेकर आते हैं। लेकिन, वार्षिक परीक्षाओं से ठीक पहले इन सुझावों पर अमल कर पाना बोर्ड को मुश्किल होता है।

ऐसे में शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही अध्यापक संघों के साथ बैठक होने से वार्षिक परीक्षाओं की तैयारियों को लेकर बोर्ड के पास पूरा साल होगा। ऐसे में बैठक में आने वाले सुझावों पर अमल आसानी से हो सकेगा।

स्कूली छात्रों को न बनाएं शोध का विषय: संघ
हमीरपुर।
प्रदेश पदोन्नत प्रवक्ता संघ की राज्य कार्यकारिणी की बैठक राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हमीरपुर में रविवार को हुई। इसकी अध्यक्षता राज्य प्रधान रत्नेश्वर सलारिया ने की। बैठक में सरकार के समक्ष रखी जाने वाली विभिन्न मांगों पर चर्चा की गई। कहा कि सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को शोध का विषय न बनाया जाए।

दिन-प्रतिदिन इन्हीं पर नए-नए प्रयोग किए जाते हैं। संघ ने मांग की है कि सभी परीक्षा केंद्रों में कैमरों की व्यवस्था की जाए। जो निजी स्कूल कैमरों की व्यवस्था नहीं करते हैं, उनका परीक्षा केंद्र रद्द किया जाए। पीजीटी का पदनाम बदलकर स्कूल प्रवक्ता किया जाए। प्रवक्ता से प्रधानाचार्य की पदोन्नति के लिए वरिष्ठता सूची का निर्धारण पदोन्नत प्रवक्ताओं एवं सीधी भर्ती प्रवक्ताओं में 1:1 में किया जाए।

पूर्व सैनिकों के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले एवं सरकार की अधिसूचना के अनुसार वरिष्ठता सूचियों में अतिशीघ्र संशोधन किया जाए। मुख्याध्यापकों की पदोन्नति पर प्रवक्ताओं का वेतनमान संरक्षित रखा जाए। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार अर्जित अवकाश की 300 दिन की अधिकतम सीमा को समाप्त किया जाए।

पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए। सभी तरह की गैर शैक्षणिक गतिविधियों जिनमें एनएसएस, खेलकूद, विज्ञान मेले, अध्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम और स्काउट एंड गाइड आदि कार्यक्रम शामिल हैं, का आयोजन प्रतिवर्ष 31 अक्तूबर से पहले पूरा किया जाए।

बैठक में राज्य महासचिव यशवीर जम्वाल, वित्त सचिव महिंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष हरिमन शर्मा, नंदलाल शर्मा, जीएस डढवाल, बिलासपुर जिला प्रधान संजीव शर्मा, हमीरपुर प्रधान केवल ठाकुर, मंडी से कमल किशोर, ऊना से मोहन लाल, कांगड़ा से प्रदीप धीमान, सिरमौर से अनुराधा गर्ग, प्रेस सचिव विकास धीमान, संगठन मंत्री विनोद शर्मा, प्रवीण गुलेरिया, रविदास, राजिंद्र कपूर,

प्रीतम ठाकुर, संदीप डढवाल, सपना ठाकुर, रेणु गौतम, रेणुबाला, हरकिरण, मीना, ओपी शर्मा, नरेश, अभिलाष, अजय नंदा, अरविंद जगोता, रविंद्र शर्मा, अशोक, राजेश चड्ढा, राजेश वकील, नरेश, प्रीतम कौशल, राजकुमार, दलजीत चौहान, कमलेश शेखर सहित 70 सदस्यों ने भाग लिया।

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