जागरण संवाददाता, शिमला : हिमाचल प्रदेश विवि में नए सत्र में पढ़ाई को
सुचारू रखने के लिए प्रशासन ने गेस्ट फैकल्टी के तहत शिक्षकों को दोबारा रख
लिया है। लेकिन नए किसी भी शिक्षक को नहीं रखा है। बीते वर्ष जिन शिक्षकों
को रखा गया था। उनकी सेवाएं ही बहाल की गई है।
28 अगस्त को कोर्ट में इससे
संबधित सुनवाई होनी है। कोर्ट ने गेस्ट फैकल्टी के तहत रखे गए शिक्षकों को
लेकर विवि से जबाव तलब किया था। तथा नियमित शिक्षकों की तैनाती को लेकर
आदेश दिए थे। लेकिन बाद में विवि प्रशासन ने कोर्ट में कहा था कि नियमित
शिक्षकों की तैनाती के लिए समय लगेगा। ऐसे में पढ़ाई बाधित न होने को लेकर
गेस्ट फैकल्टी को जारी रखने की सिफारिश की थी। अभी 220 पद शिक्षकों के खाली
पड़े हुए हैं।
विवि प्रशासन ने करीब 70 शिक्षक गेस्ट फैकल्टी के तहत रखे हुए थे। करीब
50 शिक्षक और गेस्ट फैकल्टी के तहत रखने हैं, जबकि अब कोर्ट ने इस पर रोक
लगा दी थी। लेकिन विवि प्रशासन ने पहले रखे गए गेस्ट फैकल्टी में शिक्षकों
की सेवाएं कोर्ट के आगामी आदेश तक बहाल कर दिया है। लीगल स्टडीज, यूआइआइटी,
बीएचएम और अन्य प्रोफेशनल कोर्सिस में अधिकतर गेस्ट फैकल्टी के तहत ही
शिक्षक रखे गए हैं।
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अब कोर्ट से राहत देने की लगाई गुहार
एचपी यूनिवर्सिटी प्रशासन ने फिर से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
प्रशासन ने कोर्ट से गेस्ट फैकल्टी के तहत शिक्षकों को रखने के लिए इजाजत
मागी है। प्रशासन का कहना है कि कोर्ट यदि उन्हें इजाजत देता है तभी व
शिक्षकों को रख सकते हैं। क्योंकि नियमित शिक्षकों को इतनी जल्दी नहीं रखा
जा सकता है। इसके लिए पहले विज्ञापन निकालना पड़ेगा और पूरी प्रक्रिया में
समय लगेगा।
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क्या है गेस्ट फैकल्टी
हिमाचल प्रदेश विवि की ओर से पीएचडी धारक, नेट पास और एमफिल पास को
गेस्ट फैकल्टी के तहत रखा जाता है। इसके लिए अलग अलग विभागों की ओर से
साक्षात्कार की तिथि घोषित की जाती है और पात्र का इंटरव्यू होता है। एक
साल के लिए गेस्ट फैकल्टी के तहत शिक्षक रखा जाता है। हर वर्ष नए तरीके से
साक्षात्कार लिए जाते हैं। हर लेक्चर का शिक्षक को 500 से एक हजार रुपये
दिया जाता है। हर माह 25 हजार रुपये वेतन निर्धारित किया गया है। यही नहीं
कई बार परीक्षा केंद्रों में भी गेस्ट फैकल्टी पर रखे गए शिक्षकों की
ड्यूटिया लगाई जाती हैं।
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गेस्ट फैकल्टी के तहत नए नियुक्तियां नहीं की जाएगी लेकिन जो पहले सेवाएं दे रहे थे। उन्हें बहाल किया गया ताकि पढ़ाई बाधित न हो।
-आचार्य सिकंदर कुमार कुलपति हिमाचल प्रदेश विवि।