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अनुबंध न बढ़ने पर एसएमसी शिक्षकों में रोष

संवाद सहयोगी, टाहलीवाल : प्रदेश सरकार ने अनुबंध नीति के इंतजार में बैठे स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) शिक्षकों का शैक्षणिक सत्र 2017-18 के लिए एक साल का अनुबंध रिन्यू नहीं किया है। इस कारण 13 फरवरी से खुले प्रदेश के शीतकालीन स्कूलों में तैनात ढाई हजार पीरियड बेसिस एसएमसी शिक्षक स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इससे इस वर्ग में रोष है।

एसएमसी अध्यापक संघ के सचिव अनवर खान ने कहा कि जल्द इस संबंध में उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री से मिलेंगे तथा समस्या से अवगत करवाया जाएगा क्योंकि कई स्कूल एसएमसी शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। शीतकालीन स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों का अनुबंध 31 दिसंबर को खत्म हो गया था। ग्रीष्मकालीन स्कूलों में तैनात करीब दो हजार एसएमसी शिक्षकों का अनुबंध 31 मार्च को खत्म हो रहा है। सरकार हर साल शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले एसएमसी शिक्षकों के अनुबंध का नवीनीकरण करती आ रही है। ऐसा पहली बार हुआ है कि प्रदेश सरकार ने स्कूल में शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद भी अनुबंध नवीनीकरण नहीं किया है। शिक्षकों से शिक्षा निदेशालय हर साल अनुबंध करता है। एसएमसी के तहत नियुक्त जेबीटी को 3500 रुपये, टीजीटी को छह हजार रुपये व सीएंडवी शिक्षक को 4500 रुपये मानदेय दिया जाता है। जनवरी में शिक्षकों ने शिमला में सम्मेलन कर मुख्यमंत्री और युवा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विक्रमादित्य ¨सह को सम्मानित किया था। सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने एसएमसी शिक्षकों के लिए अनुबंध नीति बनाने का आश्वासन दिया था। 31 दिसंबर 2016 को एक साल का अनुबंध पूरा कर चुके एसएमसी शिक्षक आजकल अनुबंध नीति आने के इंतजार में थे। नीति की घोषणा होना तो दूर, शिक्षकों को एक्सटेंशन भी नहीं मिल सकी है। प्रदेश में करीब चार हजार एसएमसी शिक्षकों को दूरदराज के स्कूलों में नियुक्तियां दी गई हैं। दूरदराज के जिन स्कूलों में नियमित शिक्षक जाने से गुरेज करते हैं, वहां एसएमसी शिक्षकों के सहारे बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

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