शिमला: हिमाचल में विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद
ई.सी. ने शिक्षक भर्ती और पी.एच.डी. क लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। अापको
बता दें कि विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की वीरवार को कुलपति प्रो.
ए.डी.एन. वाजपेयी की अध्यक्षता में विशेष बैठक बुलाई गई।
इस बैठक में कार्यकारी परिषद ने शिक्षक भर्ती की पात्रता को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के रेगुलेशन 2010 के तृतीय संशोधन की 4 मई 2016 को जारी अधिसूचना को विश्वविद्यालय में लागू किए जाने का फैसला लिया है।
जानकारी के मुताबिक अब सहायक आचार्य विश्वविद्यालय में भर्ती के लिए इन्हीं नियमों को लागू करेगा। इस कार्यकारिणी परिषद की बैठक में 2009 से पी.एच.डी. डिग्री उम्मीदवारों को जारी अस्थाई प्रमाण पत्रों के विषय में उच्च न्यायालय के पी. सुशीला मामले में 16 मार्च 2015 को दिए फैसले को लागू करने का निर्णय लिया गया।
उक्त अस्थाई प्रमाण पत्रों की वैधता के अध्ययन के लिए प्रति कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी गठन का निर्णय भी लिया गया है। कमेटी इसमें कानूनी पहलुओं का भी बारीकी से अध्ययन करेगी। यह उच्च स्तरीय कमेटी जो रिपोर्ट देगी उसी पर निर्भर करेगा कि पूर्व में 2009 से पहले पी.एच.डी. डिग्री धारकों को जारी किए प्रमाण पत्र वाले उम्मीदवार सहायक आचार्य पद के पीएचडी को नेट/स्लेट /सेट से मिलने वाली छूट के लिए पात्र हैं या नहीं।
इस बैठक में कुलपति ने वर्ष 2013-14 के वार्षिक प्रतिवेदन को भी स्वीकृति प्रदान की। बैठक में शिक्षक भर्ती को लेकर के नियमों और पात्रता शर्तों और यू.जी.सी. की नई जारी अधिसूचना को अपनाए जाने और शिक्षक भर्ती की अधर में लटकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाए जाने पर विस्तार से चरचा की गई।
ये हैं यू.जी.सी. में पी.एच.डी. के लिए नई शर्तें
बताया जा रहा है कि एच.पी.यू. ने सहायक आचार्य पद की भर्ती में दी छूट यूजीसी विनियम 2010 के तृतीय संशोधन की भारत राजपत्र में जारी अधिसूचना को विवि पूरी तरह से लागू करने का फैसला हुआ है। इस संशोधन के मुताबिक सहायक आचार्य पद पर भर्ती में नेट/स्लेट /सेट से छूट लेने के लिए पी.एच.डी. तय मानकों के मुताबिक की होनी जरूरी होगी।
इस बैठक में कार्यकारी परिषद ने शिक्षक भर्ती की पात्रता को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के रेगुलेशन 2010 के तृतीय संशोधन की 4 मई 2016 को जारी अधिसूचना को विश्वविद्यालय में लागू किए जाने का फैसला लिया है।
जानकारी के मुताबिक अब सहायक आचार्य विश्वविद्यालय में भर्ती के लिए इन्हीं नियमों को लागू करेगा। इस कार्यकारिणी परिषद की बैठक में 2009 से पी.एच.डी. डिग्री उम्मीदवारों को जारी अस्थाई प्रमाण पत्रों के विषय में उच्च न्यायालय के पी. सुशीला मामले में 16 मार्च 2015 को दिए फैसले को लागू करने का निर्णय लिया गया।
उक्त अस्थाई प्रमाण पत्रों की वैधता के अध्ययन के लिए प्रति कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी गठन का निर्णय भी लिया गया है। कमेटी इसमें कानूनी पहलुओं का भी बारीकी से अध्ययन करेगी। यह उच्च स्तरीय कमेटी जो रिपोर्ट देगी उसी पर निर्भर करेगा कि पूर्व में 2009 से पहले पी.एच.डी. डिग्री धारकों को जारी किए प्रमाण पत्र वाले उम्मीदवार सहायक आचार्य पद के पीएचडी को नेट/स्लेट /सेट से मिलने वाली छूट के लिए पात्र हैं या नहीं।
इस बैठक में कुलपति ने वर्ष 2013-14 के वार्षिक प्रतिवेदन को भी स्वीकृति प्रदान की। बैठक में शिक्षक भर्ती को लेकर के नियमों और पात्रता शर्तों और यू.जी.सी. की नई जारी अधिसूचना को अपनाए जाने और शिक्षक भर्ती की अधर में लटकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाए जाने पर विस्तार से चरचा की गई।
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बताया जा रहा है कि एच.पी.यू. ने सहायक आचार्य पद की भर्ती में दी छूट यूजीसी विनियम 2010 के तृतीय संशोधन की भारत राजपत्र में जारी अधिसूचना को विवि पूरी तरह से लागू करने का फैसला हुआ है। इस संशोधन के मुताबिक सहायक आचार्य पद पर भर्ती में नेट/स्लेट /सेट से छूट लेने के लिए पी.एच.डी. तय मानकों के मुताबिक की होनी जरूरी होगी।
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