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एचपीयू के कई डिपार्टमेंट गेस्ट फैकल्टी के सहारे

हिमाचल प्रदेश विवि में कई विभाग तो पूरी तरह की गेस्ट फैकल्टी के सहारे चल रहे हैं। यूनिवर्सिटी के यूआईआईटी विभाग में 25 शिक्षक गेस्ट फैकल्टी के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। 16 साल पहले शुरू हुए इस विभाग में अभी तक पूरी रेग्युलर फैकल्टी नहीं लग पाई।
अभी फिलहाल यहां केवल 9 शिक्षक ही रेग्युलर आधार पर सेवांए दे रहे हैं। इसके अलावा भी यूनिवर्सिटी के बायोसाइंस, अर्थशास्त्र, लॉ और सोशल सांइस जैसे विभाग ऐसे हैं जहां पर 5-5 शिक्षक गेस्ट फैकल्टी के आधार पर सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से हिंदी का विभाग ऐसा रहा है, जहां केवल एक रेग्युलर शिक्षक सालों से अकेले सेवाएं दे रहा था। एचपीयू प्रशासन हर साल इन पदों को भरने की बात करता है, लेकिन कई साल बीतने के बावजूद यहां गेस्ट फैकल्टी ही स्टूडेंट्स काे पढ़ा रहे हैं। यूनिवर्सिटी के यूआईआईटी विभाग में पिछले शैक्षणिक सत्र में 25 शिक्षक गेस्ट फैकल्टी के तौर पर रखे थे, जबकि वर्तमान में यहां 21 शिक्षक गेस्ट फैकल्टी के तौर पर सेवाएंं दे रहे हैं। इसके अलावा संस्कृत विभाग में 4, बायोसांइस में 5, साइकोलॉजी में 1, मास कम्यूनिकेशन और जर्नलिज्म विभाग में 1, अर्थशास्त्र में 6, अंग्रेजी विभाग में 2, हिंदी में चार, फिजिक्स में 1, लॉ में 5, जियोग्राफी में 2, शिक्षा में 2 और सोशल साइंस में 5 शिक्षक सेवांए दे रहे हैं। कुछ ऐसे भी विभाग हैं जिनमें गेस्ट फैकल्टी नहीं हैं इनमें संगीत, बुद्धिस्ट स्टडी व्यवसायिक अध्ययन, केमिस्ट्री, काॅमर्स, लोक प्रशासन, बिजनेस स्कूल, दृश्यकला विभाग शामिल हैं।

नैककी टीम ने जताई थी हैरानी: हालही में 3 अक्टूबर को नैक की टीम ने यूनिवर्सिटी का दौरा किया था। नैक की टीम ने विभिन्न विभागों में शिक्षकों की कमी और गैस्ट फैकल्टी को लेकर हैरानी जताई थी। नैक की टीम ने हिंदी विभाग एक शिक्षक पर भी सवाल उठाए थे।

तीनसाल के लिए रखे जाते हैं शिक्षक: रेग्युलरशिक्षक होने पर गेस्ट फैकल्टी को तय समय अवधी के लिए रखा जाता है। इनमें सेवा निवृत्त शिक्षकों को बिना साक्षात्कार के अन्य गेस्ट फैकल्टी को साक्षात्कार के आधार पर तीन वर्ष के लिए रखा जाता है। सेवानिवृत्त गेस्ट फैकल्टी को 1 हजार प्रति व्याख्यान के तौर पर अन्य को 500 रुपए प्रति व्याख्यान रखा जाता है, गेस्ट फैकल्टी को देय राशि 25 हजार प्रति माह से अधिक नहीं होनी चाहिए।

इन विभागों में है शिक्षकों की कमी

यूआईआईटीविभाग, हिंदी, पत्रकारिता, संगीत, योगा जैसे विभागों में प्रोफेसरों के कई पद रिक्त हैं। हिंदी विभाग में ही 14 पद स्वीकृत है, जबकि यहां पर सिर्फ एक ही पद पर शिक्षक की रेग्युलर नियुक्ति है। पत्रकारिता विभाग दो प्रोफेसरों के भरोसे है। विभाग में एक तो एचओडी हैं और एक प्रोफेसर है। यहां पर एमएमसी और पीजीडीएमसी के एक सेमिस्टर में 55 छात्र पढ़ाई करते हैं। दूसरे और तीसरे सेमेस्टर को मिलाकर छात्र 150 से ऊपर छात्र हैं। संगीत विभाग में सिर्फ तीन प्राध्यापक मौजूद हैं, जिसमें एक विभागाध्यक्ष है। संगीत विभाग के पहले सेमेस्टर में 45 से अधिक छात्र पढ़ाई करते हैं। एमफिल और पीएचडी स्कॉलर की संख्या दो सौ से अधिक है। योगा में एक भी शिक्षक नहीं है। यूं तो योग को बढ़ाने के लिए कई दावे राष्ट्रीय स्तर पर किए जाते हैं, लेकिन कोई काम नहीं किया जा रहा है।
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