राज्य ब्यूरो, शिमला : सरकारी शिक्षकों की राजनीति व सरकारी स्कूलों में
घटती बच्चों की संख्या से सदन में पक्ष व विपक्ष दोनों तरफ से चिंता जताई
गई। गैर सरकारी सदस्य कार्यदिवस के तहत भाजपा विधायक कर्नल इंद्र सिंह
द्वारा सरकारी स्कूलों में समस्त सुविधाओं के बावजूद विद्यार्थियों की घटती
संख्या पर रोक लगाने के लिए ठोस नीति बनाने को लेकर संकल्प प्रस्ताव
प्रस्तुत किया गया।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की राजनीति बढ़ने से शिक्षा के प्रभावित होने का मामला उठाया। इसके साथ ही गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए सुझाव रखे। इंद्र सिंह ने कहा कि सरकारी स्कूलों में एक बच्चे की शिक्षा के लिए सरकार 30-40 हजार रुपये खर्च कर रही है। स्कूल तो खोल दिए हैं लेकिन उनमें बच्चे नहीं हैं। बेहतर शिक्षा के लिए हर पंचायत में दो मॉडल स्कूल खोले जाएं व हर प्राथमिक स्कूल में पांच शिक्षक नियुक्त हों। जनजातीय क्षेत्रों में नवोदय की तर्ज पर स्कूल खोले जाएं व बैकडोर भर्तिया बंद हों। स्कूलों की संख्या को कम किया जाए।
जयराम बोले, स्कूल कैंपस में शराब पीते हैं शिक्षक
वेतन मिले पर काम न करना पड़े है शिक्षकों की सोच
जयराम ठाकुर ने कहा कि शिक्षकों का हम कुछ नहीं कर सकते। चाहे किसी की भी सरकार हो, शिक्षक स्कूल कैंपस में शराब पीते हैं और ताश खेलते हैं। हम लिख कर देते हैं मगरअधिकारी कोई कार्रवाई ही नहीं करते हैं। शिक्षकों की सरकारी सोच है कि वेतन मिले पर काम न करना पड़े।
जयराम ने अपनी सरकार के समय का किस्सा सदन में सुनाया जब वह मंत्री थे। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक उनके साथ ही रहता था, जैसा अकसर शिक्षक करते हैं। शिक्षक के न पढ़ाने पर जब उसका स्थानांतरण कर दिया गया तो वह मेरे ही क्षेत्र के नेताओं को ले आया और न चाहते हुए भी शिक्षक को एडस्ट करना पड़ा। उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी है।
गिरते शिक्षा स्तर के लिए शिक्षकों की राजनीति जिम्मेदार : आशा कुमारी
विधायक आशा कुमारी ने कहा कि शिक्षा के गिरते स्तर के लिए शिक्षकों की राजनीति जिम्मेदार है। शिक्षकों की संख्या इतनी ज्यादा है कि वे किसी भी सरकार पर दवाब बना सकते हैं। शिक्षकों का ध्यान पढ़ाने पर कम और राजनीति की तरफ ज्यादा रहता है। निजी स्कूलों में पढ़ाना लोगों ने स्टेटस सिंबल बना दिया है। कई शिक्षक ऐसे हैं जो बिल्कुल भी नहीं पढ़ाते और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।
जनजातीय क्षेत्रों में खुलें रेजिडेंशियल को-एजुकेशन स्कूल
विधानसभा उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी ने कहा कि अंग्रेजी मीडियम को सरकारी स्कूलों में लाया जाना जरूरी है। उन्होंने सरकार द्वारा शिक्षा के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में रेजिडेंशियल को-एजुकेशन स्कूल खोलने का सुझाव भी दिया।
स्कूलों का हो औचक निरीक्षण
विधायक हंसराज ने विधायकों और उच्च अधिकारियों द्वारा स्कूलों के औचक निरीक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर परिणाम देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाना चाहिए। शिक्षकों की कमी को दूर किया जाना जरूरी है। जब स्कूलों में शिक्षक ही नहीं होंगे तो पढ़ाई कहां से होगी। सरकारी स्कूलों का स्तर बढ़ाने की आवश्यकता है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की राजनीति बढ़ने से शिक्षा के प्रभावित होने का मामला उठाया। इसके साथ ही गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए सुझाव रखे। इंद्र सिंह ने कहा कि सरकारी स्कूलों में एक बच्चे की शिक्षा के लिए सरकार 30-40 हजार रुपये खर्च कर रही है। स्कूल तो खोल दिए हैं लेकिन उनमें बच्चे नहीं हैं। बेहतर शिक्षा के लिए हर पंचायत में दो मॉडल स्कूल खोले जाएं व हर प्राथमिक स्कूल में पांच शिक्षक नियुक्त हों। जनजातीय क्षेत्रों में नवोदय की तर्ज पर स्कूल खोले जाएं व बैकडोर भर्तिया बंद हों। स्कूलों की संख्या को कम किया जाए।
जयराम बोले, स्कूल कैंपस में शराब पीते हैं शिक्षक
वेतन मिले पर काम न करना पड़े है शिक्षकों की सोच
जयराम ठाकुर ने कहा कि शिक्षकों का हम कुछ नहीं कर सकते। चाहे किसी की भी सरकार हो, शिक्षक स्कूल कैंपस में शराब पीते हैं और ताश खेलते हैं। हम लिख कर देते हैं मगरअधिकारी कोई कार्रवाई ही नहीं करते हैं। शिक्षकों की सरकारी सोच है कि वेतन मिले पर काम न करना पड़े।
जयराम ने अपनी सरकार के समय का किस्सा सदन में सुनाया जब वह मंत्री थे। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक उनके साथ ही रहता था, जैसा अकसर शिक्षक करते हैं। शिक्षक के न पढ़ाने पर जब उसका स्थानांतरण कर दिया गया तो वह मेरे ही क्षेत्र के नेताओं को ले आया और न चाहते हुए भी शिक्षक को एडस्ट करना पड़ा। उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी है।
गिरते शिक्षा स्तर के लिए शिक्षकों की राजनीति जिम्मेदार : आशा कुमारी
विधायक आशा कुमारी ने कहा कि शिक्षा के गिरते स्तर के लिए शिक्षकों की राजनीति जिम्मेदार है। शिक्षकों की संख्या इतनी ज्यादा है कि वे किसी भी सरकार पर दवाब बना सकते हैं। शिक्षकों का ध्यान पढ़ाने पर कम और राजनीति की तरफ ज्यादा रहता है। निजी स्कूलों में पढ़ाना लोगों ने स्टेटस सिंबल बना दिया है। कई शिक्षक ऐसे हैं जो बिल्कुल भी नहीं पढ़ाते और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।
जनजातीय क्षेत्रों में खुलें रेजिडेंशियल को-एजुकेशन स्कूल
विधानसभा उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी ने कहा कि अंग्रेजी मीडियम को सरकारी स्कूलों में लाया जाना जरूरी है। उन्होंने सरकार द्वारा शिक्षा के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में रेजिडेंशियल को-एजुकेशन स्कूल खोलने का सुझाव भी दिया।
स्कूलों का हो औचक निरीक्षण
विधायक हंसराज ने विधायकों और उच्च अधिकारियों द्वारा स्कूलों के औचक निरीक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर परिणाम देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाना चाहिए। शिक्षकों की कमी को दूर किया जाना जरूरी है। जब स्कूलों में शिक्षक ही नहीं होंगे तो पढ़ाई कहां से होगी। सरकारी स्कूलों का स्तर बढ़ाने की आवश्यकता है।