हिमाचलराजकीय अध्यापक संघ ने प्रधान शिक्षा सचिव हिमाचल प्रदेश से मांग की
है कि प्राथमिक शिक्षा में ढांचागत परिर्वतन किया जाए। इसके लिए संघ ने उप
निदेशक शिक्षा प्रारंभिक जिला कुल्लू कुलवंत सिंह पठानिया के माध्यम से
उन्हें ज्ञापन भी भेजा।
उन्होंने ज्ञापन में हवाला दिया है कि जिस तरह से सरकारी क्षेत्र में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है उसे ऊपर उठाने के लिए नीतियों में बदलाव करने की आवश्यकता है और इसके लिए शिक्षकों की भागीदारी जरूरी है।
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ जिला कुल्लू के अध्यक्ष डॉ. सुनील वर्मा, महासचिव यशपाल शर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि शिक्षा में सक्रियता के साथ सुधार करने की आवश्यकता है। शिक्षा के क्षेत्र में नित नए प्रयाेग होने से अध्यापकों पर भी अनावश्यक बोझ बढ़ रहा है और वे अपने शिक्षण कार्य को समय नहीं दे पा रहे हैं। हर जिला में 20-20 आदर्श विद्यालयों की व्यवस्था करने पर बल दिया है। इससे वर्तमान में हमारे शिक्षकों को अपनी योग्यता का प्रदर्शन करने का मौका भी मिलेगा। इस प्रकार के निर्णय से शिक्षकों का मनाेबल भी बढे़गा और सरकारी स्कूलों में गिरती हुई नामांकन में भी भरपूर वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा है कि आए दिन सरकार शिक्षक छात्र अनुपात का ही हवाला देती आई है जबकि प्राथमिक कक्षाओं में वास्तविकता यह है कि दो शिक्षक और पांच कक्षाएं होती हैं और कुल मिलाकर एक दिन में 25 पीरियड होते हैं। जिस कारण दो शिक्षकों के लिए एक दिन में 25 पीरियड लेना असंभव कार्य हैं। इस समस्या को हल करने के लिए हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने ज्ञापन में योजना बनाने के लिए सुझाव दिए हैं।
इसके अलावा हाल ही में शिक्षा सचिव द्वारा जारी आदेशानुसार जिसमें उप शिक्षा निदेशकों को जिलाधीश के नियंत्रण में किया गया है इसका संघ ने विरोध किया है। संघ ने कहा कि सरकार को इस प्रकार के निर्णय लेने से पहले शिक्षक वर्ग को विश्वास में लेना चाहिए और पहले से बने आरएंडपी रूल के अनुसार ही कार्य करने चाहिए। शिक्षा विभाग के उच्च पदों पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति के प्रयास का भी संघ ने विरोध किया है।
उन्होंने ज्ञापन में हवाला दिया है कि जिस तरह से सरकारी क्षेत्र में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है उसे ऊपर उठाने के लिए नीतियों में बदलाव करने की आवश्यकता है और इसके लिए शिक्षकों की भागीदारी जरूरी है।
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ जिला कुल्लू के अध्यक्ष डॉ. सुनील वर्मा, महासचिव यशपाल शर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि शिक्षा में सक्रियता के साथ सुधार करने की आवश्यकता है। शिक्षा के क्षेत्र में नित नए प्रयाेग होने से अध्यापकों पर भी अनावश्यक बोझ बढ़ रहा है और वे अपने शिक्षण कार्य को समय नहीं दे पा रहे हैं। हर जिला में 20-20 आदर्श विद्यालयों की व्यवस्था करने पर बल दिया है। इससे वर्तमान में हमारे शिक्षकों को अपनी योग्यता का प्रदर्शन करने का मौका भी मिलेगा। इस प्रकार के निर्णय से शिक्षकों का मनाेबल भी बढे़गा और सरकारी स्कूलों में गिरती हुई नामांकन में भी भरपूर वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा है कि आए दिन सरकार शिक्षक छात्र अनुपात का ही हवाला देती आई है जबकि प्राथमिक कक्षाओं में वास्तविकता यह है कि दो शिक्षक और पांच कक्षाएं होती हैं और कुल मिलाकर एक दिन में 25 पीरियड होते हैं। जिस कारण दो शिक्षकों के लिए एक दिन में 25 पीरियड लेना असंभव कार्य हैं। इस समस्या को हल करने के लिए हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने ज्ञापन में योजना बनाने के लिए सुझाव दिए हैं।
इसके अलावा हाल ही में शिक्षा सचिव द्वारा जारी आदेशानुसार जिसमें उप शिक्षा निदेशकों को जिलाधीश के नियंत्रण में किया गया है इसका संघ ने विरोध किया है। संघ ने कहा कि सरकार को इस प्रकार के निर्णय लेने से पहले शिक्षक वर्ग को विश्वास में लेना चाहिए और पहले से बने आरएंडपी रूल के अनुसार ही कार्य करने चाहिए। शिक्षा विभाग के उच्च पदों पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति के प्रयास का भी संघ ने विरोध किया है।