बिलासपुर : प्रदेश स्कूल
शिक्षा बोर्ड द्वारा 12वीं व 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के पेपरों के
मूल्यांकन हेतु प्रदेश के विभिन्न जिलों के विभिन्न स्कूलों में बनाए गए
मूल्यांकन केंद्रों में मुख्य परीक्षकों के रूप में नियुक्त किए गए
पी.जी.टी. कम्प्यूटर शिक्षकों को मुख्य परीक्षक से हटाकर उपपरीक्षक बना
दिया गया है। पूरे प्रदेश के विभिन्न जिलों में बोर्ड ने 53 मूल्यांकन
केंद्र बनाए हैं।
बोर्ड के इस नए फरमान का इन सभी परीक्षा केंद्रों पर
मूल्यांकन कार्य में लगे पी.जी.टी. कम्प्यूटर शिक्षकों ने कड़ी निंदा करते
हुए अपना विरोध दर्ज करवाया और प्रदेश के सभी 53 मूल्यांकन केंद्रों पर
10वीं व 12वीं कक्षा के कम्प्यूटर साइंस के पेपरों के मूल्यांकन का
बहिष्कार कर दिया है।
हालांकि वर्ष 2014 से नियमित लगे
पी.जी.टी. कम्प्यूटर शिक्षक मूल्यांकन कार्य कर रहे हैं। कम्प्यूटर शिक्षक
संघ का कहना है कि केवल नियमित शिक्षकों को मुख्य परीक्षक लगाना व
कम्प्यूटर शिक्षकों को मुख्य परीक्षक पद से हटा देना गलत है। संघ के
महासचिव राकेश शर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के नियम
के अनुसार मुख्य परीक्षक की नियुक्ति के लिए कम से कम 10 वर्ष का अध्यापन
अनुभव संबंधित विषय में होना चाहिए, लेकिन बोर्ड ने अपने नए आदेशों में
अपने इसी नियम की धज्जियां उड़ा दी हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न
मूल्यांकन केंद्रों में कम्प्यूटर शिक्षकों को बोर्ड द्वारा निर्धारित
नियमों के तहत ही मुख्य परीक्षक लगाया गया था, क्योंकि 10 वर्ष के अध्यापन
अनुभव नियम में कहीं भी नियमित शिक्षक ही होना नहीं लिखा है। हिमाचल प्रदेश
कम्प्यूटर शिक्षक संघ ने मांग की है कि इस नए निर्णय को बोर्ड प्रबंधन
रद्द करे तथा पहले की ही तरह पी.जी.टी. कम्प्यूटर शिक्षकों को मुख्य
परीक्षक लगाए, अन्यथा 10वीं व 12वीं कक्षा के कम्प्यूटर साइंस विषय के
पेपरों के मूल्यांकन का बहिष्कार पूरे प्रदेश में जारी रहेगा।
इस विषय में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा
बोर्ड के सचिव डा. हरीश गज्जू का कहना है कि कम्प्यूटर शिक्षकों को
मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कंपनी के माध्यम से
लगे प्रदेश के सभी पी.जी.टी. कम्प्यूटर शिक्षकों से आह्वान किया कि वे इस
निर्णय को व्यक्ति तौर पर न लें तथा प्रदेश व शिक्षा हित में बोर्ड के
परीक्षा केंद्रों में कम्प्यूटर साइंस पेपरों के मूल्यांकन कार्य पर लौटें।