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वित्त विभाग ने मंजूरी दी स्वास्थ्य विभाग में 173 पद भरने की मंजूरी

शिमला. स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े पदों को सरकार जल्द ही भरने जा रहा है। इनमें सबसे ज्यादा 141 पद स्टाफ नर्सों के हैं। जबकि ओटीए, रेडियोग्राफर सहित ईसीजी टेक्निशियन और सीएसएसबी सहित 15 कैटेगरी में इन पदों को भरा जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग कुछ पदों को हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से भरा जाएगा जबकि कुछेक पदों को आउट सोर्स से भरने की तैयारी चल रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से खाली पड़े पदों को भरने का मामला वित्त विभाग को भेजा गया था। शनिवार को वित्त विभाग ने स्वास्थ्य विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। फरवरी महीने में आयोजित होने वाली कैबिनेट की बैठक में इन पदों को भरने का प्रस्ताव रखा जाएगा।
कैबिनेट की अप्रूवल के बाद इन्हें भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वित्त विभाग ने इसकी फाइल अप्रूवल कर प्रधान सचिव हेल्थ प्रबोध सक्सेना को भेज दी है। सरकार ने डाॅक्टरों के खाली पड़े पदों को भरने के लिए बाहरी राज्यों में जाकर इंटरव्यू करवाने का निर्णय लिया है। जबकि नए खुले मेडिकल कॉलेजों के लिए चंडीगढ़ में 28 जनवरी से इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू हुई है।
पीजीआई और एम्स के अलावा नामी स्वास्थ्य संस्थानों से रिटायर हुए डाॅक्टरों को इन इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है। सबसे ज्यादा 141 स्टाफ नर्सों के पद भरे जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ नर्सों की कैडर स्ट्रेंथ 1562 हैं। इनमें 152 आईजीएमसी, 139 टांडा मेडिकल कॉलेज, 78 नाहन, 47 मंडी में 47, चंबा में 62 और हमीरपुर में 143 पद खाली पड़े हुए हैं। हालांकि विभाग अभी केवल 141 पदों को ही भरने जा रहा है।
कहां कितने पद भरेंगे
नाम सेंक्शन पोस्ट
ओटीए 18 6
रेडियोग्राफर 15 6
डार्क रूम 15 --
ईसीजी ट. 12 सर्विस
एक्सरे टेक्निक 2 1
सीएसएसबी 15 5
सीएसएसबी 8 6
लाइब्रेरियन 3 --
असि. लाइब्रेरियन 3 --
लाइब्रेरी असि. 3 --
ड्राइवर 16 16
ये पद भरे जाएंगे आउट सोर्स से :स्वास्थ्य विभाग प्रशासनिक पोस्ट, क्लास-4, ईसीजी टेक्निशियन के पदों को नियमित आधार पर भरने के बजाए आउट सोर्स से भरेगा। इसके लिए वित्त विभाग की मंजूरी मिल चुकी है।
5700 करोड़ का सालाना प्लान 6 फरवरी को होगा पास प्लानिंग बोर्ड की बैठक में मिलेगी मंजूरी
शिमला हिमाचल सरकार के अगले वित्तीय वर्ष के प्लान छह फरवरी को मंजूर किया जाएगा। राज्य प्लानिंग बोर्ड की बैठक में इस मसले पर चर्चा कर मंजूरी दी जानी है। इस बार राज्य सरकार ने अपने प्लान साइज में 500 करोड़ की बढ़ोकरी कर इसे 5700 करोड़ कर दिया है।
इसे छह फरवरी को होने वाली बैठक में प्लानिंग बोर्ड के समक्ष मंजूरी के लिए लाया जाना है। राज्य प्लानिंग विभाग ने लंबी कसरत के बाद अपना प्लान साइज तैयार कर दिया है।
चुनावी वर्ष होने के नाते इस बार रोजगार से लेकर शिक्षा आैर सड़क निर्माण पर राज्य सरकार का ज्यादा केंद्रीत रहने की उम्मीद है।
सूत्रों की माने तो राज्य सरकार ने अपने प्लान आकार में आेर ज्यादा बढ़ाने की तैयारी में थी, लेकिन वित्तीय स्थिति आैर सरकार के आय को स्रोम फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं है। इसलिए राज्य सरकार ने इसमें दस फीसदी ही बढ़ोतरी की है। प्लान आकार के मंजूर होने के बाद राज्य सरकार ने पूरा साल विकास कार्यों पर कैसे कहां खर्च करना है, इसके पूरे खाके को मंंजूरी दी जाती है।
अब केंद्र से नहीं ली जाती है मंजूरी : केंद्र में प्लानिंग कमीशन होने पर पहले राज्य सरकार के प्लान साइज को तैयार कर केंद्र के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता था। अब केंद्र सरकार की आेर से प्लानिंग कमीशन को ही खत्म कर दिया है। इसके स्थान पर केंद्र पर नीति आयोग का गठन किया है। इसके बाद से राज्यों के प्लान साइज को केंद्र के पास नहीं भेजा जाता है।
केंद्र से नीति आयोग अपने तरीके से राज्यों को फंड करता है, हालांकि पहले प्लान आकार पर ही राज्यों को फंडिंग होती रहती थी। राज्य में कितना काम किया जाना है। इसके लिए कितना खर्चकिस मद में किया जाना है। इसका पूरा खाका राज्य सरकार की आेर से तैयार करवाया जाता है। साल भर वित्तीय वर्ष में इसी आधार पर विकासात्मक कार्यों पर खर्च किया जाता है। इसी आधार पर राज्य सरकार को अपने आय के स्रोतों में भी इजाफा करना होता है।

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