शिमला.एचपी यूनिवर्सिटी का बजट 191 कराेड़ का होगा। सोमवार को सचिवालय में हुई वित्त कमेटी की बैठक में बजट रखा गया। इस बार 25 करोड़ घाटे का बजट है। पिछली बार 20.36 करोड़ घाटे का बजट था। हालांकि, इस बार सरकार की ओर से 1 अरब की आर्थिक सहायता विवि को दी गई है। एचपीयू देश की पहली ऐसी यूनिवर्सिटी है, जिसे सरकार 100 करोड़ की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। विवि के बजट में दर्शाया गया है कि लगभग 66 करोड़ विवि के अपने संसाधनों से प्राप्त होंगे।
23 मार्च को होने वाली ईसी की बैठक में बजट काे पास किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी ने वर्ष 2016-17 के लिए 177.50 करोड़ का बजट पेश किया था। जिसमें 20.36 करोड़ का घाटा बताया गया। पिछली बार की तुलना में इस बार घाटा बढ़ा है। वर्ष 2015-16 के लिए 155.24 करोड़ का बजट पास किया गया था, जिसमें 24.76 करोड़ का घाटा बताया गया।बढ़ी फीस, सरकार से मिला फायदाः विवि को जहां बढ़ी हुई फीस से लाभ मिला है, वहीं सरकार की ओर से भी इस बार बजट को 10 करोड़ बढ़ाया गया है। विश्वविद्यालय में कुल आय 191 करोड़ रुपए होगी, जिसमें राज्य सरकार से 100 करोड़ तथा अपने संसाधनों से 66 करोड़ प्रस्तावित है। वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए भी 23 करोड़ घाटे के बजट को पारित किया था।
इस दौरान विवि का कुल बजट 130 करोड़ रुपए का था। ऐसे में वर्ष 2017-18 का बजट पिछले दो वर्षों की तुलना में बेहतर आंका जा रहा है। जहां विवि के आय के स्त्रोत में हल्की बढ़ोतरी हुई है, वहीं सरकार की ओर से भी काफी मदद मिली है।
कर्मचारियों के लिए बनेगा तीन मंजिला भवनः
कर्मचारियों के लिए तीन मंजिला कैंटीन के भवन बनाने के लिए 1.50 कराेड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। बजट में कर्मचारियों का भी खास ध्यान रखा गया है। इससे गैर शिक्षक कर्मचारियों के लिए कैंटीन,काॅमन हाल व सेवानिवृत कर्मचारियों के लिए कमरों के प्रावधान किए गए हैं। ईसी सदस्य राजकुमारी ने कर्मचारियों के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान करने हेतु प्रदेश सरकार व विश्वविधालय प्रशासन के समक्ष इस मांग को उठाया था।
यहां समझें, विवि की अाय व्यय
-विवि की आय का मुख्य स्त्रोत सरकार द्वारा बढ़ाए जाने वाला बजट और छात्रों से अाने वाली फीस है।
-विवि के बजट का एक बड़ा हिस्सा कर्मचारियों, प्रोफेसरों, पैंशनरों की सैलरी में जाता है, लगभग एक वर्ष में 90 करोड़ इस पर खर्च आता है।
-यूजीसी से डिवेलपमेंट के लिए ग्रांट आती है, लेकिन विवि इसे प्रशासनिक कार्य में खर्च नहीं कर सकता है।
-विवि की ओर से जो फीस वृद्धि की गई है, उससे 10 से 12 करोड़ की आय हो रही है।
-सरकार की ओर से विवि काे 100 करोड़ मिलेगा, जबकि विवि का अनुमान है कि अपने संसाधनों से 66 करोड़ वह प्राप्त कर लेंगे।
-विवि को लगभग पांच करोड़ की कमाई परीक्षा फीस व अन्य चार्जिस से आती है, इसी तरह प्रश्न पत्रों व अन्य प्रिंटिंग सामग्री पर लगभग अढ़ाई करोड़ से ज्यादा का खर्च भी आ जाता है।
छात्रों पर इस बार बोझ नहीं
इस बार एचपीयू ने बजट में संतुलन बनाने का प्रयास किया है। ऐसे में छात्रों पर इसका बाेझ नहीं पड़ेगा। घाटे वाले बजट को पेश कर प्रशासन ने संकेत तो दे दिया है, कि फीस को कम करने की कोई संभावना नहीं है, लेकिन हर वर्ष बढ़ने वाली 10 फीसदी फीस भी नहीं बढ़ेगी।
कक्षाओं को स्मार्ट क्लास रूम में कनवर्ट करने का प्रयास रहेगा। इसके अलावा कैंपस में वाई फाई की सुविधा व शिक्षकों की कमी को दूर करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। छात्रों के लिए घणाहट्टी कैंपस, मॉडल स्कूल और कर्मचारियों के अतिरिक्त आवास के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है।
23 मार्च को होने वाली ईसी की बैठक में बजट काे पास किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी ने वर्ष 2016-17 के लिए 177.50 करोड़ का बजट पेश किया था। जिसमें 20.36 करोड़ का घाटा बताया गया। पिछली बार की तुलना में इस बार घाटा बढ़ा है। वर्ष 2015-16 के लिए 155.24 करोड़ का बजट पास किया गया था, जिसमें 24.76 करोड़ का घाटा बताया गया।बढ़ी फीस, सरकार से मिला फायदाः विवि को जहां बढ़ी हुई फीस से लाभ मिला है, वहीं सरकार की ओर से भी इस बार बजट को 10 करोड़ बढ़ाया गया है। विश्वविद्यालय में कुल आय 191 करोड़ रुपए होगी, जिसमें राज्य सरकार से 100 करोड़ तथा अपने संसाधनों से 66 करोड़ प्रस्तावित है। वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए भी 23 करोड़ घाटे के बजट को पारित किया था।
इस दौरान विवि का कुल बजट 130 करोड़ रुपए का था। ऐसे में वर्ष 2017-18 का बजट पिछले दो वर्षों की तुलना में बेहतर आंका जा रहा है। जहां विवि के आय के स्त्रोत में हल्की बढ़ोतरी हुई है, वहीं सरकार की ओर से भी काफी मदद मिली है।
कर्मचारियों के लिए बनेगा तीन मंजिला भवनः
कर्मचारियों के लिए तीन मंजिला कैंटीन के भवन बनाने के लिए 1.50 कराेड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। बजट में कर्मचारियों का भी खास ध्यान रखा गया है। इससे गैर शिक्षक कर्मचारियों के लिए कैंटीन,काॅमन हाल व सेवानिवृत कर्मचारियों के लिए कमरों के प्रावधान किए गए हैं। ईसी सदस्य राजकुमारी ने कर्मचारियों के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान करने हेतु प्रदेश सरकार व विश्वविधालय प्रशासन के समक्ष इस मांग को उठाया था।
यहां समझें, विवि की अाय व्यय
-विवि की आय का मुख्य स्त्रोत सरकार द्वारा बढ़ाए जाने वाला बजट और छात्रों से अाने वाली फीस है।
-विवि के बजट का एक बड़ा हिस्सा कर्मचारियों, प्रोफेसरों, पैंशनरों की सैलरी में जाता है, लगभग एक वर्ष में 90 करोड़ इस पर खर्च आता है।
-यूजीसी से डिवेलपमेंट के लिए ग्रांट आती है, लेकिन विवि इसे प्रशासनिक कार्य में खर्च नहीं कर सकता है।
-विवि की ओर से जो फीस वृद्धि की गई है, उससे 10 से 12 करोड़ की आय हो रही है।
-सरकार की ओर से विवि काे 100 करोड़ मिलेगा, जबकि विवि का अनुमान है कि अपने संसाधनों से 66 करोड़ वह प्राप्त कर लेंगे।
-विवि को लगभग पांच करोड़ की कमाई परीक्षा फीस व अन्य चार्जिस से आती है, इसी तरह प्रश्न पत्रों व अन्य प्रिंटिंग सामग्री पर लगभग अढ़ाई करोड़ से ज्यादा का खर्च भी आ जाता है।
छात्रों पर इस बार बोझ नहीं
इस बार एचपीयू ने बजट में संतुलन बनाने का प्रयास किया है। ऐसे में छात्रों पर इसका बाेझ नहीं पड़ेगा। घाटे वाले बजट को पेश कर प्रशासन ने संकेत तो दे दिया है, कि फीस को कम करने की कोई संभावना नहीं है, लेकिन हर वर्ष बढ़ने वाली 10 फीसदी फीस भी नहीं बढ़ेगी।
कक्षाओं को स्मार्ट क्लास रूम में कनवर्ट करने का प्रयास रहेगा। इसके अलावा कैंपस में वाई फाई की सुविधा व शिक्षकों की कमी को दूर करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। छात्रों के लिए घणाहट्टी कैंपस, मॉडल स्कूल और कर्मचारियों के अतिरिक्त आवास के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है।