शिमला। हिमाचल सरकार विभिन्न महकमों में 63 दागी अफसरों (ऑफिसर्स विद डाउटफुल इंटेग्रिटी) से काम चला रही है। यही नहीं, उनमें से 27 अफसर तो संवेदनशील पदों पर तैनात हैं। ये खुलासा विधानसभा के बजट सत्र में प्रश्नकाल के दौरान हुआ।
दरअसल, भाजपा विधायक नरेंद्र ठाकुर ने सरकार के विभिन्न महकमों में तैनात उन अफसरों की जानकारी चाही थी, जिनकी इंटेग्रिटी डाउटफुल है। जवाब में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बताया कि कुल 63 अफसर ऐसे हैं, जिनके दामन पर कोई न कोई दाग है। इनमें से 27 अफसर संवेदनशील पदों पर पोस्टेड हैं। नरेंद्र ठाकुर के सवाल पर मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि संवेदनशील पदों पर तैनात अफसरों को हटाने के लिए सरकार विचार करेगी। भाजपा विधायक नरेंद्र ठाकुर के सवाल के तीन हिस्से थे। ठाकुर के सवाल के पहले हिस्से के अनुसार क्या प्रदेश सरकार ने दागी अफसरों को लेकर कोई सर्वे किया है? इसके अलावा नरेंद्र ठाकुर ने ये जानना चाहा था कि कितने विभागों में कितने दागी अफसर तैनात हैं और उनमें से कितने संवेदनशील पदों पर हैं।
जवाब में सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि अलबत्ता राज्य सरकार ने दागी अफसरों को लेकर कोई सर्वे नहीं किया है, लेकिन प्रदेश सरकार के अलग-अलग महकमों से हासिल हुई जानकारी के अनुसार दागी अफसरों की संख्या 67 है और उनमें से 27 संवेदनशील पदों पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दागदार छवि के अधिकारियों को गैर संवेननशील पदों पर तैनाती दी गई है।
सीएम ने कहा कुछ अफसरों को संवेदनशील पदों पर नियुक्ति मिली है। सिंचाई व जनस्वास्थ्य विभाग में 11, पुलिस में 4, ऊर्जा विभाग में 14, कार्मिक विभाग में 1, लोक निर्माण विभाग में 12, ग्रामीण विकास व पंचायती राज विभाग में 5, राजस्व विभाग, सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग, परिवहन, तकनीकी शिक्षा, शिक्षा 1, उद्योग विभाग, आबकारी विभाग व कृषि विभाग, इन सभी में में एक-एक, वन विभाग में 3, स्वास्थ्य व निदेशालय स्वास्थ्य सुरक्षा नियमन में 4 अफसरों की इंटेग्रिटी डाउटफुल है। जहां तक संवेदनशील पदों की बात है, उर्जा विभाग में सबसे अधिक 14 संवेदनशील पदों पर दागी अधिकारी तैनात हैं।
इसके अलावा लोक निर्माण विभाग में 4, ग्रामीण विकास विभाग में 5, राजस्व व शिक्षा विभाग में 1, स्वास्थ्य व हेल्थ सेफ्टी रेगुलेटरी डायरेक्टोरेट में 2 अफसर दागी हैं। ग्रामीण विकास विभाग में पांच बीडीओ दागी हैं। दो फूड सेफ्टी अफसरों के दामन पर भी दाग है। उर्जा विभाग के दागी अफसरों में सभी इंजीनियर हैं। तीन आईएफएस यानी भारतीय वन सेवा के अफसर भी डाउटफुल इंटेग्रिटी वाले हैं, लेकिन उनकी तैनाती गैर संवेदनशील पदों पर है। भाजपा विधायक नरेंद्र ठाकुर ने मांग उठाई कि संवेदनशील पदों से सभी दागी अफसरों को हटाया जाए। इस पर सीएम ने भरोसा दिया कि सरकार मामले पर विचार करेगी।
दरअसल, भाजपा विधायक नरेंद्र ठाकुर ने सरकार के विभिन्न महकमों में तैनात उन अफसरों की जानकारी चाही थी, जिनकी इंटेग्रिटी डाउटफुल है। जवाब में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बताया कि कुल 63 अफसर ऐसे हैं, जिनके दामन पर कोई न कोई दाग है। इनमें से 27 अफसर संवेदनशील पदों पर पोस्टेड हैं। नरेंद्र ठाकुर के सवाल पर मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि संवेदनशील पदों पर तैनात अफसरों को हटाने के लिए सरकार विचार करेगी। भाजपा विधायक नरेंद्र ठाकुर के सवाल के तीन हिस्से थे। ठाकुर के सवाल के पहले हिस्से के अनुसार क्या प्रदेश सरकार ने दागी अफसरों को लेकर कोई सर्वे किया है? इसके अलावा नरेंद्र ठाकुर ने ये जानना चाहा था कि कितने विभागों में कितने दागी अफसर तैनात हैं और उनमें से कितने संवेदनशील पदों पर हैं।
जवाब में सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि अलबत्ता राज्य सरकार ने दागी अफसरों को लेकर कोई सर्वे नहीं किया है, लेकिन प्रदेश सरकार के अलग-अलग महकमों से हासिल हुई जानकारी के अनुसार दागी अफसरों की संख्या 67 है और उनमें से 27 संवेदनशील पदों पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दागदार छवि के अधिकारियों को गैर संवेननशील पदों पर तैनाती दी गई है।
सीएम ने कहा कुछ अफसरों को संवेदनशील पदों पर नियुक्ति मिली है। सिंचाई व जनस्वास्थ्य विभाग में 11, पुलिस में 4, ऊर्जा विभाग में 14, कार्मिक विभाग में 1, लोक निर्माण विभाग में 12, ग्रामीण विकास व पंचायती राज विभाग में 5, राजस्व विभाग, सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग, परिवहन, तकनीकी शिक्षा, शिक्षा 1, उद्योग विभाग, आबकारी विभाग व कृषि विभाग, इन सभी में में एक-एक, वन विभाग में 3, स्वास्थ्य व निदेशालय स्वास्थ्य सुरक्षा नियमन में 4 अफसरों की इंटेग्रिटी डाउटफुल है। जहां तक संवेदनशील पदों की बात है, उर्जा विभाग में सबसे अधिक 14 संवेदनशील पदों पर दागी अधिकारी तैनात हैं।
इसके अलावा लोक निर्माण विभाग में 4, ग्रामीण विकास विभाग में 5, राजस्व व शिक्षा विभाग में 1, स्वास्थ्य व हेल्थ सेफ्टी रेगुलेटरी डायरेक्टोरेट में 2 अफसर दागी हैं। ग्रामीण विकास विभाग में पांच बीडीओ दागी हैं। दो फूड सेफ्टी अफसरों के दामन पर भी दाग है। उर्जा विभाग के दागी अफसरों में सभी इंजीनियर हैं। तीन आईएफएस यानी भारतीय वन सेवा के अफसर भी डाउटफुल इंटेग्रिटी वाले हैं, लेकिन उनकी तैनाती गैर संवेदनशील पदों पर है। भाजपा विधायक नरेंद्र ठाकुर ने मांग उठाई कि संवेदनशील पदों से सभी दागी अफसरों को हटाया जाए। इस पर सीएम ने भरोसा दिया कि सरकार मामले पर विचार करेगी।