हिमाचलप्रदेशविश्वविद्यालय (एचपीयू) के पूर्व कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी
के खिलाफ शुरू हुई जांच के बाद कई परतें खुलना शुरू हो गई है।
विश्वविद्यालय टीचर एसोसिएशन (हपुटवा) ने भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री
कार्यालय (पीएमओ) और एमएचआरडी को शिकायत पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग
उठाई थी।
एसोसिएशन के महासचिव डाॅ. देसराज ठाकुर ने दिसंबर 2016 में ये शिकायत की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय से इसकी जांच के आदेश राज्य के मुख्य सचिव को दिए गए। शिक्षा सचिव ने एचपीयू से इसकी रिपोर्ट तलब की। 3 जनवरी को इसकी इन्क्वायरी शुरू हुई।
सूत्रों के मुताबिक कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने अपने रसूख के चलते एचपीयू के रजिस्ट्रार के मार्फत पत्र भिजवाया। इसमें कहा गया था कि ऐसी कोई भी अनियमितता विवि प्रशासन ने नहीं बरती है। एचपीयू में जो भर्तियां हुई है वह सारी नियमों के तहत है। हैरानी की बात ये है कि राज्य सरकार ने एचपीयू के इस कमेंट के बाद जांच को बंद कर दिया। जबकि शिकायत पत्र में भ्रष्टाचार के कई गंभीर मामलों को डॉक्यूमेंट के साथ उठाया गया था। एचपीयू के पूर्व वीसी एडीएन वाजपेयी पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में कुलपति बने थे। वीसी के पद पर तीन साल का सेवाकाल पूरा होने के बाद कांग्रेस सरकार ने उनका कार्यकाल तीन साल के लिए बढ़ाया।
हपुटवा ने तीन पन्नों का शिकायत पत्र पीएमओ और एमएचआरडी को भेजा था। हर शिकायत के साथ प्रूफ के तौर पर डॉक्यूमेंट अटैच किया गया था। एचपीयू प्रशासन पर आरोप लगाया था कि भर्तियों में नियमों की अनदेखी की गई है। यूजीसी द्वारा तय नेट, सेट की अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को छुपाते हुए विवि के एकीकृत हिमालयन अध्ययन संस्थान (आईआईएचएस) में चहेतों को लाभ दिया गया। परियोजना में निर्धारित पारिश्रमिक पर काम कर रहे कर्मचारियों को वित्त अधिकारी यानि एक व्यक्ति की कमेटी की सिफारिशों से सीधे पे बैंड 15,500-39100 में बिना विवि के अध्यादेश एक्ट में निर्धारित चयन प्रक्रिया से नियमित कर दिया गया। नियमितिकरण की तारीख से दो-दो पदोन्नतियां भी दी गई। इसके लिए कुलपति ने अपनी विशेष शक्तियों (12 सी)का प्रयोग किया जो न्याय संगत नहीं है।
क्या है मामला
एचपीयूमें सहायक आचार्य भर्तियों में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायत हुई है। केंद्रीय विजिलेंस कमिशन ने राज्य सरकार को इसकी जांच के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार ने ज्वाइंट सेक्रेटरी हायर को इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। दो रोज पूर्व जांच अधिकारी ने एचपीयू जाकर इस पूरे मामले के दस्तावेजों को तलब कर दिया है। विवि के कुलपति पर आरोप है कि भर्तियों में लेनदेन हुआ है। भर्तियों में लेनदेन और भाई भतीजावाद के अलावा नॉन टीचिंग स्टाफ को फायदा पहुंचाने और वित्तीय अनियमितताओं की जांच भी शुरू हुई है।
2 इंप्लॉइज को रिटारयमेंट से पहले बेनफिट दिया
एचपीयूमें भारी वित्तीय अनियमितता हुई है। गैर शिक्षक कैडर के दो कर्मचारियों को रिटायरमेंट से पहले बेनफिट दिया गया। नियमों में छूट देकर 3-3 प्रमोशनें दी गई। एसओ से सहायक कुल सचिव के लिए तीन साल सहायक कुल सचिव उप कुलसचिव के लिए दो सालों का अंतराल होना जरूरी है। एक विशेष विचारधारा से संबंध रखने वाले इन कर्मचारियों को लाखों का फायदा पहुंचाया गया। जो ड्राफ्टमैन के पद पर तैनात थे उन्हें एसडीओ बनाया।
सहायक आचार्य भर्ती में यूजीसी नियमों में दी छूट
एचपीयूमें सहायक आचार्य भर्ती के लिए यूजीसी की निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं को हटाकर भर्ती की गई। यूजीसी के विभिन्न निर्देशों को धत्ता बताकर उन अभ्यार्थियों की नियुक्तियां की गई जो शैक्षणिक योग्यताएं पूरी नहीं रखते थे। ऐसे चहेतों को नियुक्ति दी गई है जिनकी पीएचडी नहीं थी। शिकायत में कहा है कि क्या देश में शैक्षणिक योग्यताओं का अकाल पड़ गया है जो ऐसे व्यक्ति को नियुक्तियां देनी पड़ रही है।
एसोसिएशन के महासचिव डाॅ. देसराज ठाकुर ने दिसंबर 2016 में ये शिकायत की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय से इसकी जांच के आदेश राज्य के मुख्य सचिव को दिए गए। शिक्षा सचिव ने एचपीयू से इसकी रिपोर्ट तलब की। 3 जनवरी को इसकी इन्क्वायरी शुरू हुई।
सूत्रों के मुताबिक कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने अपने रसूख के चलते एचपीयू के रजिस्ट्रार के मार्फत पत्र भिजवाया। इसमें कहा गया था कि ऐसी कोई भी अनियमितता विवि प्रशासन ने नहीं बरती है। एचपीयू में जो भर्तियां हुई है वह सारी नियमों के तहत है। हैरानी की बात ये है कि राज्य सरकार ने एचपीयू के इस कमेंट के बाद जांच को बंद कर दिया। जबकि शिकायत पत्र में भ्रष्टाचार के कई गंभीर मामलों को डॉक्यूमेंट के साथ उठाया गया था। एचपीयू के पूर्व वीसी एडीएन वाजपेयी पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में कुलपति बने थे। वीसी के पद पर तीन साल का सेवाकाल पूरा होने के बाद कांग्रेस सरकार ने उनका कार्यकाल तीन साल के लिए बढ़ाया।
हपुटवा ने तीन पन्नों का शिकायत पत्र पीएमओ और एमएचआरडी को भेजा था। हर शिकायत के साथ प्रूफ के तौर पर डॉक्यूमेंट अटैच किया गया था। एचपीयू प्रशासन पर आरोप लगाया था कि भर्तियों में नियमों की अनदेखी की गई है। यूजीसी द्वारा तय नेट, सेट की अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को छुपाते हुए विवि के एकीकृत हिमालयन अध्ययन संस्थान (आईआईएचएस) में चहेतों को लाभ दिया गया। परियोजना में निर्धारित पारिश्रमिक पर काम कर रहे कर्मचारियों को वित्त अधिकारी यानि एक व्यक्ति की कमेटी की सिफारिशों से सीधे पे बैंड 15,500-39100 में बिना विवि के अध्यादेश एक्ट में निर्धारित चयन प्रक्रिया से नियमित कर दिया गया। नियमितिकरण की तारीख से दो-दो पदोन्नतियां भी दी गई। इसके लिए कुलपति ने अपनी विशेष शक्तियों (12 सी)का प्रयोग किया जो न्याय संगत नहीं है।
क्या है मामला
एचपीयूमें सहायक आचार्य भर्तियों में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायत हुई है। केंद्रीय विजिलेंस कमिशन ने राज्य सरकार को इसकी जांच के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार ने ज्वाइंट सेक्रेटरी हायर को इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। दो रोज पूर्व जांच अधिकारी ने एचपीयू जाकर इस पूरे मामले के दस्तावेजों को तलब कर दिया है। विवि के कुलपति पर आरोप है कि भर्तियों में लेनदेन हुआ है। भर्तियों में लेनदेन और भाई भतीजावाद के अलावा नॉन टीचिंग स्टाफ को फायदा पहुंचाने और वित्तीय अनियमितताओं की जांच भी शुरू हुई है।
2 इंप्लॉइज को रिटारयमेंट से पहले बेनफिट दिया
एचपीयूमें भारी वित्तीय अनियमितता हुई है। गैर शिक्षक कैडर के दो कर्मचारियों को रिटायरमेंट से पहले बेनफिट दिया गया। नियमों में छूट देकर 3-3 प्रमोशनें दी गई। एसओ से सहायक कुल सचिव के लिए तीन साल सहायक कुल सचिव उप कुलसचिव के लिए दो सालों का अंतराल होना जरूरी है। एक विशेष विचारधारा से संबंध रखने वाले इन कर्मचारियों को लाखों का फायदा पहुंचाया गया। जो ड्राफ्टमैन के पद पर तैनात थे उन्हें एसडीओ बनाया।
सहायक आचार्य भर्ती में यूजीसी नियमों में दी छूट
एचपीयूमें सहायक आचार्य भर्ती के लिए यूजीसी की निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं को हटाकर भर्ती की गई। यूजीसी के विभिन्न निर्देशों को धत्ता बताकर उन अभ्यार्थियों की नियुक्तियां की गई जो शैक्षणिक योग्यताएं पूरी नहीं रखते थे। ऐसे चहेतों को नियुक्ति दी गई है जिनकी पीएचडी नहीं थी। शिकायत में कहा है कि क्या देश में शैक्षणिक योग्यताओं का अकाल पड़ गया है जो ऐसे व्यक्ति को नियुक्तियां देनी पड़ रही है।