मकसद चहेतों के लिए बैकडोर रास्ता खोलना है। यही कारण है कि पंकज कुमार बनाम स्टेट ऑफ हिमाचल केस में सुप्रीमकोर्ट के ऑर्डर और भर्ती की प्रक्रिया को लेकर मतभेद हैं। पिछली कैबिनेट में भी यह केस गया था। काफी देर चर्चा के बाद जब कोई फैसला नहीं हुआ तो यह रिकॉर्ड कर फाइल लौटाई गई कि मंत्रियों को यह विषय समझने के लिए और वक्त चाहिए। इसलिए अब मामला दोबारा भेजा जा रहा है।
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई को देखते हुए सरकार एसएमसी आधार पर टीचर भरना चाह रही है। तर्क दिया जा रहा है कि ये टीचर पीरियड आधार पर होंगे और इस तरीके से भर्ती जल्द हो जाएगी। हालांकि अभी तक हाईकोर्ट को दिए रिप्लाई में यह बात नहीं बताई गई है। मंत्रिमंडल इस तरीके से भर्ती करना तो चाहता है, लेकिन आरटीई एक्ट की शर्तों और सुप्रीमकोर्ट के फैसले को देखते हुए शिक्षा विभाग इससे बच रहा है। इसी गतिरोध को देखते हुए फाइल लॉ को भी भेजी गई थी। लॉ ने राय दी है कि 2017 में जो कोर्ट से निर्देश आए हैं, तब एसएमसी पॉलिसी को चुनौती नहीं दी गई थी।
इस राय से मसला और उलझ गया है। पूर्व कांग्रेस सरकार के समय एसएमसी भर्ती में कई गलतियां की हैं। पहले पीरियड आधार पर इन्हें हार्ड एरिया में लगाया गया। फिर हार्ड एरिया को भी रिलेक्स कर दिया। फिर निर्देश जारी कर दिए कि रेगुलर टीचर इन्हें रिप्लेस नहीं करेंगे। अब 2680 पीरियड आधारित एसएमसी टीचर हैं और इन्हें सेवाकाल में विस्तार वर्तमान भाजपा सरकार ने भी दे दिया।
14354 पद खाली, हाईकोर्ट में 1 अगस्त को केस
हाईकोर्ट में चल रहे रिक्तियां संबंधी केस में शिक्षा विभाग ने खुद बताया है कि यदि आरटीई के दायरे में नहीं आने वाले टीचर्स को बाहर रखा जाए तो इस वक्त 14354 पद खाली हैं। इस केस पर अब 1 अगस्त को सुनवाई है और शिक्षा सचिव से दोबारा जवाब मांगा गया है। हालांकि विभाग ने यह भी कहा है कि शिक्षकों के करीब 4500 पदों पर नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
पंकज कुमार केस में सुप्रीमकोर्ट ने कहा है कि समान योग्यता रखने वाले लोगों को बराबर मौका दिया जाए, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 309 में सबको यह अधिकार है। ऐसे में एसएमसी भर्ती में राज्य से कोई कहीं भी आवेदन कर सकेगा। लेकिन कुछ मंत्रियों का तर्क है कि यह फैसला किसी और केस का है।
हिमाचल चंूकि इंटरव्यू खत्म कर चुका है, ऐसे में एसएमसी टीचर किस आधार पर चुना जाए कि चयन कानूनन भी सही हो? ट्रिब्यूनल के आदेशों के बाद जेबीटी भर्ती भी स्टेट कैडर की तरह हो रही है, जबकि जेबीटी जिला कैडर है। ऐसे मेें एसएमसी भर्ती को बीच का रास्ता निकालना मुश्किल हो रहा है।
एसएमसी की पुरानी प्रक्रिया को 2012 में कोर्ट ने रद कर दिया है। इसलिए अब आरटीई के मुताबित भर्ती होगी। यह केवल पीरियड आधार पर स्टॉप गैप अरेंजमेंट होगा। टेट पास ही इसके लिए पात्र होंगे। इसके लिए हार्ड एरिया भी नए सिरे से तय करना होगा। ये सभी शर्तें कुछ मंत्रियों को पसंद नहीं आ रही।