शिमला —हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में प्रशासनिक
शाखाओं से हर माह कर्मचारियों की संख्या का आंकड़ा घटता जा रहा है। हालात
यह हैं कि माह के अंत में एचपीयू से चार या पांच गैर शिक्षक कर्मचारी
सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
कर्मचारी तो सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन उनके
स्थान पर नई नियुक्तियां विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं कर रहा है। रिक्त पदों
पर नियुक्तियां न होने से अब शाखाओं में कर्मचारी घटते जा रहे हैं।
कर्मचारियों की कम होती संख्या प्रशासन के लिए चिंता का कारण बन रही है।
हालात यह हैं कि शाखाओं में काम करने के लिए कर्मचारियों की कमी अब प्रशासन
के आड़े आ रही है। सारी दिक्कतें प्रशासन के समक्ष हैं, लेकिन प्रशासन अभी
भी इन रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती की प्रक्रिया नहीं करवा रहा है।
विश्वविद्यालय में लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया रुकी पड़ी है। न तो
शिक्षकों के पद एचपीयू भर रहा है और न ही गैर शिक्षक कर्मचारियों के पदों
को भरने के लिए नियुक्तियां विश्वविद्यालय प्रशासन कर पा रहा है।
कर्मचारियों के रिक्त होते पदों को पदोन्नति से भी एचपीयू भर रहा है, लेकिन
जो पद पदोन्नति के बाद भी रिक्त हो रहे हैं उन्हें भरने के लिए कोई भी पद
विवि ने विज्ञापित नहीं किए हैं। एचपीयू में गैर शिक्षक कर्मचारियों के 200
के करीब पद रिक्त पड़े हैं। इन पदों को भरने से प्रशासनिक शाखा को जहां
कर्मचारी मिलेंगे वहीं, काम के बोझ तले दबे कर्मचारियों को भी राहत मिलेगी।
अभी परीक्षा शाखा में कर्मचारियों की कमी के चलते दिक्कतें प्रशासन को आ
रही हैं। कर्मचारी नहीं हैं, इसकी वजह से जो कर्मचारी शाखाओं में काम कर
रहे हैं उन पर अतिरिक्त बोझ है। परीक्षा परिणाम के समय भी कर्मचारियों को
ओवर टाइम शाखाओं में करना पड़ता है। इतनी परेशानियों के बावजूद प्रशासन ने
रिक्त पदों को भरने के लिए कोई पहल ही नहीं की है। एचपीयू प्रशासन को अभी
तक नियुक्तियों को करवाने के लिए नए कुलपति का ही इंतजार है। एक साल बीत
चुका है लेकनि विश्वविद्यालय को कुलपति पद पर नियुक्ति नहीं मिली है।
कुलपति की नियुक्ति न होने की वजह से ही न तो शिक्षकों के पद एचपीयू में भर
पा रहे हैं और न ही गैर शिक्षक कर्मचारियों के पदों पर नियुक्ति हो रही
है। नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू करने के लिए एचपीयू सरकार के निर्देशों
का भी इंतजार कर रहा है, लेकिन अभी तक वहां से भी कोई निर्देश विवि को नहीं
मिल पाए हैं।