जम्वाल ने कहा कि वर्ष 2006 से लेकर 2018 तक विभिन्न अस्थायी नीतियों के तहत नियुक्त लगभग 16000 अध्यापक अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्हें विभाग में 12 वर्ष की सेवाएं देने के बाद भी इस बात की चिंता सता रही है कि कब सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय उन्हें शिक्षा विभाग से अलविदा होने पर मजबूर कर दे। इस प्रकार की नियुक्तियों में कमियां रह जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह नियुक्तियां अधिकांश दूरदराज के क्षेत्रों में ही की जाती हैं।
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16000 अध्यापक अपने भविष्य को लेकर चिंतित
हमीरपुर। प्रदेश पदोन्नत स्कूल प्रवक्ता संघ ने सरकार के एसएमसी के आधार पर
अध्यापकों के पदों को भरने के निर्णय का विरोध किया है। संघ की कोर कमेटी
के अध्यक्ष केवल ठाकुर और प्रदेश महासचिव यशवीर
जम्वाल ने कहा कि वर्ष 2006 से लेकर 2018 तक विभिन्न अस्थायी नीतियों के तहत नियुक्त लगभग 16000 अध्यापक अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्हें विभाग में 12 वर्ष की सेवाएं देने के बाद भी इस बात की चिंता सता रही है कि कब सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय उन्हें शिक्षा विभाग से अलविदा होने पर मजबूर कर दे। इस प्रकार की नियुक्तियों में कमियां रह जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह नियुक्तियां अधिकांश दूरदराज के क्षेत्रों में ही की जाती हैं।
सभी पात्र व्यक्तियों को एक समान मौका नहीं मिलता। इन्हीं खामियों के कारण
उक्त अध्यापकों की नियुक्तियों और नियमितीकरण का मामला सर्वोच्च न्यायालय
में विचाराधीन है। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा विभाग में भर्ती
और पदोन्नतियां नियमों के तहत हों। स्थायी आधार पर अध्यापकों की नियुक्ति
की जाए और दुर्गम क्षेत्रों के सेवाकाल को पदोन्नति में अनिवार्य किया जाए।
इससे जहां दुर्गम क्षेत्रों में अध्यापकों के पद खाली नहीं रहेंगे वहीं,
प्रदेश स्तर पर अध्यापकों के पदों को भरने के लिए सब को एक समान अवसर
उपलब्ध होगा। इस मौके पर हरिमन शर्मा, विक्रम वर्मा, संजीव शर्मा, मोहनलाल,
प्रदीप धीमान, विकास धीमान, रविदास, संदीप डढवाल, विनोद शर्मा, अजय नंदा
आदि उपस्थित रहे।
जम्वाल ने कहा कि वर्ष 2006 से लेकर 2018 तक विभिन्न अस्थायी नीतियों के तहत नियुक्त लगभग 16000 अध्यापक अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्हें विभाग में 12 वर्ष की सेवाएं देने के बाद भी इस बात की चिंता सता रही है कि कब सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय उन्हें शिक्षा विभाग से अलविदा होने पर मजबूर कर दे। इस प्रकार की नियुक्तियों में कमियां रह जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह नियुक्तियां अधिकांश दूरदराज के क्षेत्रों में ही की जाती हैं।