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कम परीक्षा परिणाम देने वालों पर कार्रवाई के फरमान से भड़के शिक्षक

संवाद सूत्र, बडूखर : प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 25 प्रतिशत से कम परिणाम देने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई के फरमान से शिक्षक भड़क गए हैं। इसका विभिन्न शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है।
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के जिला कांगड़ा के प्रधान पृथी राणा, वरिष्ठ उपप्रधान तेज पाल, उपप्रधान विजय धीमान, सुधीर पठानिया, महासचिव ओंकार चंद विभिन्न खंडों के प्रधानों व जिला कार्यकारिणी के सदस्यों प्रताप भारती, राकेश गौतम, सुरेश चौधरी, यशपाल, राजेश, विजय शर्मा, पूर्ण धीमान, मनजीत ब्यास, अजय शर्मा, चंद्रपाल शास्त्री, प्रवीण, विजय, नरेंद्र पठानिया, रजनीश डोगरा, राकेश कटोच, रणवीर चौधरी, शशिपाल, महिंद्र ¨सह, राज कुमार, पवन शर्मा, बलवीर ठाकुर, देवेंद्र, शिवदास, कुलदीप कुमार, मान ¨सह, अजय कुमार व संजय ने शिक्षकों की वेतन वृद्धि रोकने का विरोध किया है। उन्होंने इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र को निरस्त करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि अध्यापकों से स्पष्टीकरण व स्कूल प्रबंधन समिति की राय लिए बिना और अध्यापक को चेतावनी या मौका दिए बिना प्रथम बार ही वेतन वृद्धि को रोकने का निर्णय अनुचित है। इसके विरोध में शीघ्र ही सरकार व शिक्षा विभाग को राज्य अध्यक्ष एसएस रांटा व राज्य कार्यकारिणी के माध्यम से ज्ञापन दिया जाएगा।

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ये भी हैं खराब परिणाम के कारण
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि खराब परीक्षा परिणाम के लिए केवल शिक्षक ही उत्तरदायी नहीं हैं। यह एक बहुपक्षीय प्रक्रिया है, जिसमें शिक्षक, विद्यार्थी, शिक्षा विभाग, सरकार व समाज भी बराबर उत्तरदायी है। केवल अध्यापक को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। स्कूलों में शिक्षकों की कमी, पहली से आठवीं तक किसी को फेल न करने की नीति, अध्यापकों को गैरशैक्षणिक कार्यो में लगाना भी खराब परिणाम के कारण हैं, लेकिन विभाग ने केवल अध्यापकों को ही खराब परिणाम के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

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आठवीं तक फेल न करने की नीति कम परीक्षा परिणाम के लिए जिम्मेदार जागरण संवाददाता, पालमपुर : प्रदेश के सरकारी स्कूलों में परीक्षा परिणाम कम रहने का कारण केंद्र सरकार की बदली गई शिक्षा नीति है। विद्यार्थियों को अब फेल होने का डर नहीं है। यही कारण है कि आगे चलकर परीक्षा परिणाम कम आ रहे हैं। इसका ठीकरा शिक्षकों पर फोड़कर उनका वेतन रोकना गलत है। यह बात अनुबंध से नियमित अध्यापक संघर्ष मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण कुमार, सचिव भारत भूषण, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मीनाक्षी हांडा, उपाध्यक्ष शर्मिला चंदेल, मीडिया प्रभारी शैलेश मिन्हास, प्रमुख सलाहकार संतोष कुमार, सदस्य सुशील कुमार, स¨चद्र कुमार, संजीव मंगोत्रा, जिला कांगड़ा के अध्यक्ष अरुण कानूनगो, सचिव समीर पटियाल, उपाध्यक्ष जितेंद्र डोगरा व जिला चंबा के अध्यक्ष जो¨गद्र ¨सह ने संयुक्त बयान में कही। उन्होंने कहा कि परीक्षा परिणाम कम होने के कारण शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है, जो तर्कसंगत नहीं है।
आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति के कारण विद्यार्थियों को शिक्षकों का कोई डर नहीं होता है। न ही इस कारण अभिभावक ज्यादा गंभीरता दिखा रहे हैं। अत: कम परीक्षा परिणाम के लिए अन्य कारणों को भी जिम्मेदार ठहराया जाए न कि सिर्फ अध्यापकों को। साथ ही इसकी गाज सिर्फ 10वीं व 12वीं कक्षाओं के शिक्षकों पर गिराना उचित नहीं है।

--------------- शिक्षकों पर काम का अतिरिक्त बोझ आज सरकारी स्कूलों में शिक्षकों से बच्चों का भार तोलना, ब्लड ग्रुप जांच, मिड-डे मील, वर्दियां व किताबें बांटना, छात्रवृत्तियां, जाति प्रमाण पत्र व एनरोलमेंट संबंधी रिकार्ड रखने और उसे आनलाइन करने का कार्य शिक्षा विभाग ले रहा है। इसके अलावा विभिन्न जागरूकता अभियान चलाना व चुनाव ड्यूटी जैसे कार्य भी शिक्षकों को करने पड़ते हैं। इससे शिक्षकों पर अतिरिक्त कार्य का बोझ है। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है।

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