हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : शिक्षा विभाग में हुए वजीफा फर्जीवाड़े की आगामी जांच को लेकर वीरवार को होने वाली कैबिनेट में फैसला होगा। शिक्षा सचिव करोड़ों के इस घपले की प्रारंभिक जांच के तथ्य कैबिनेट के सामने रखने वाल हैं। इसके बाद सरकार से फैसला लिया जाएगा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच विजिलेंस को दी जाए या किसी अन्य एजेंसी को?
गौरतलब है कि उच्च शिक्षा विभाग में एससी, एसटी एवं ओबीसी के छात्र छात्राओं को दी जाने वाली छात्रवृत्ति में पिछले कई साल से घोटाला चल रहा था। अपने यहां फर्जी एडमिशन दिखाकर कई निजी संस्थानों ने ये वजीफा हड़पा। अब तक हुई जांच में कई संस्थानों ने इस फर्जीवाड़े को कबूल किया और इन पर पैनल्टी लगाकर छोड़ दिया गया। वर्ष 2013 में ही करीब 11 करोड़ का घपला कैग रिपोर्ट ने पकड़ा था। ये इससे पहले से जारी था। इसमें शिक्षा निदेशालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
कई छात्रों को उनकी छात्रवृत्ति तब मिली, जब उन्होंने इसकी शिकायत की। ये मामला हिमाचल दस्तक ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद ही शिक्षा विभाग ने इसकी जांच शुरू की। अब प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज होनी है, ताकि आपराधिक जांच अलग से शुरू हो सके। इसलिए मामला कैबिनेट में रखा जा रहा है।इसके अलावा कांगड़ा के गगल में स्थापित होने वाली आईटी पार्क पर वीरवार को होने वाली कैबिनेट मीटिंग में अंतिम फैसला होगा।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक दोपहर दो बजे से होगी। हालांकि आईटी विभाग ने जमीन के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी है। गगल में 27 बीघा जमीन आईटी विभाग के नाम ट्रांसफर हो चुकी है। 20 करोड़ रुपए की लागत से गगल में आईटी पार्क स्थापित किए जाने का अंतिम फैसला मंत्रिमंडल में होना है।
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, ताकि केंद्र सरकार गगल में नया आईटी पार्क स्थापित करने की अपनी अगली प्रक्रिया शुरू कर सके। यहां पार्क स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को जमीन उपलब्ध करवाए जाने को कहा है। गगल में इस आईटी पार्क के स्थापित होने से आईटी उद्योग से जुड़े 500 से 1000 लोगों को रोजगार की सुविधा प्रदान की जाएगी। वीरवार को होने वाली कैबिनेट मीटिंग में जीरो बजट खेती, विद्यार्थी वन मित्र योजना सहित अन्य योजनाओं पर चर्चा होनी है।