केंद्र सरकार के एमएचआरडी मंत्रालय की ओर से दो वर्ष की बीएड को अनिवार्य करने के बाद अब शिक्षा विभाग ने फीस स्ट्रक्चर तय कर दिया है। पहले वर्ष में छात्रों को 31 हजार 950 दूसरे वर्ष 30 हजार 920 रुपए फीस के तौर पर जमा करवाने होंगे। अर्थात पूरे 62870 रुपए देने होंगे।
}इसमें लाइब्रेरी फंड, प्रैक्टिकल, कंप्यूटर फीस, स्पोर्टस फीस, मेडिकल फंड, ट्यूशन फीस, एडमिशन फीस, को कुल मिलाकर 62 हजार से अधिक की फीस के तौर पर चुकता करने होंगे।
} एनसीटीई के नियमों के तहत एचपीयू की ओर से निजी संस्थानों को यह आदेश जारी करने होंगे। किसी भी तरह की अधिक फीस वसूली की शिकायतों पर विश्वविद्यालय प्रशासन उक्त संस्थानों के खिलाफ उचित कार्रवाई कर सकता है।
} शिक्षा विभाग के निदेशक दिनकर बुड़ाथोकी की ओर से इस तरह के आदेश जारी कर दिए गए थे।
ये है विवाद
निजीबीएड कॉलेज का कहना है कि पहले उच्च न्यायालय की ओर से फीस तय की गई थी। इसमें बीएड एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। ऐसे में तय हुआ था की ट्यूशन फीस प्रति वर्ष 35750 रुपए ली जा सकती है। अब सरकार ने अपने आदेश जारी करते हुए ट्यूशन फीस को घटाकर 25 हजार कर दिया है। निजी कॉलेज बीएड एसोसिएशन के महासचिव वेद शर्मा का कहना है कि जब फीस स्ट्रक्चर तैयार किया तो उन्हें उस बैठक में नहीं बुलाया गया। ऐसे में कैसे अपनी मर्जी से ट्यूशन फीस को कम कर दिया।
छात्रों को मिलेगा फायदा
सरकारकी ओर से जो फीस कम की गई है या तय की गई है उसका छात्रों काे सीधा फायदा मिल रहा है, लेकिन कई बीएड कॉलेज एक लाख तक फीस छात्रों से ले चुके हैं। अब जो फीस स्ट्रक्चर आया है, उसके हिसाब से छात्रों को कॉलेज की ओर से फीस वापस करनी पड़ेगी। जबकि कॉलेज प्रबंधन फीस वापस करने से इनकार कर रहे हैं।
फीस स्ट्रक्चर के संबंध में सूचना की जा रही जारी
^जोफीस स्ट्रक्चर तय हुआ है, उसके हिसाब से ही फीस ली जा सकती है। सभी कॉलेजों को फीस स्ट्रक्चर से संबंधित अधिसूचना भेजी जा रही है। इसके बाद भी अधिक फीस ली गई या फिर ली गई फीस वापस नहीं ली तो कार्रवाई की जाएगी। प्रो.राजेंद्र चौहान, प्रो वीसी एचपीयू
टयूशन फीस को कम करेंं
दोवर्ष की बीएड होने से निजी बीएड कॉलेजों में पहले से ही सीटों को भरने का संकट बना हुआ है। ऐसे में बीएड कॉलेज संचालक चाहते है कि अब टयूशन फीस को कम किया जाए। ऐसे में यदि फीस कम होती है तो कॉलेज को चलाना मुश्किल हो जाएगा। छात्रों को कॉलेज प्रबंधन जो फीस मांग रहे हैं, उन्हें देनी ही पड़ रही है। अभी तक फीस से संबंधित नोटिफिकेशन कॉलेजों में नहीं पहुंची है।
एजुकेशन रिपोर्टर | शिमला
सरकारद्वारा फीस स्ट्रक्चर तय करने के बाद अब प्रदेश के 72 निजी बीएड कॉलेज इसके विरोध में गए हैं। जबकि छात्रों ने कॉलेजों में पहले अधिक फीस दी थी, जिसे अब वह वापस मांग रहे हैं। ऐसे में सोमवार को कुछ छात्र विवि पहुंचे। यहां पर छात्रों ने प्रो. वीसी को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद प्रो. वीसी प्रो. राजेंद्र चौहान ने सभी निजी बीएड कॉलेजों को फीस से संबंधित नोटिफिकेशन जारी करने के आदेश दिए हैं। इससे पहले फीस तय होने के कारण कई निजी बीएड कॉलेजों ने अधिक फीस छात्रों से ले ली। अब जब फीस तय हुई है, छात्र इसे वापस मांग रहे हैं। वहीं, निजी कॉलेज बीएड एसोसिएशन ने मामले में कोर्ट जाने का मन बनाया है। बीएड एसोसिएशन का कहना है कि बीएड टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ की सैलरी पर हर महीने में चार लाख रुपए से अधिक खर्च होते हैं। बीएड की ट्यूशन फीस के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हो सकती है। इसके बावजूद भी इस फीस को कम किया गया है। ट्यूशन फीस तीन साल बाद 10 फीसदी बढ़नी चाहिए। ट्यूशन फीस 35,750 से बढ़कर 40 हजार होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने इसे कम करके 25 हजार किया है। इससे पहले एक वर्ष की बीएड की फीस सरकार ने 46750 रुपए तय की थी। बीएड की डिग्री दो वर्ष की हो गई। अब सरकार के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने फीस स्ट्रक्चर बनाया और फीस 62870 रुपए तय की। जिसमें ट्यूशन फीस 35 हजार से घटाकर 25 हजार की गई है।
}इसमें लाइब्रेरी फंड, प्रैक्टिकल, कंप्यूटर फीस, स्पोर्टस फीस, मेडिकल फंड, ट्यूशन फीस, एडमिशन फीस, को कुल मिलाकर 62 हजार से अधिक की फीस के तौर पर चुकता करने होंगे।
} एनसीटीई के नियमों के तहत एचपीयू की ओर से निजी संस्थानों को यह आदेश जारी करने होंगे। किसी भी तरह की अधिक फीस वसूली की शिकायतों पर विश्वविद्यालय प्रशासन उक्त संस्थानों के खिलाफ उचित कार्रवाई कर सकता है।
} शिक्षा विभाग के निदेशक दिनकर बुड़ाथोकी की ओर से इस तरह के आदेश जारी कर दिए गए थे।
ये है विवाद
निजीबीएड कॉलेज का कहना है कि पहले उच्च न्यायालय की ओर से फीस तय की गई थी। इसमें बीएड एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। ऐसे में तय हुआ था की ट्यूशन फीस प्रति वर्ष 35750 रुपए ली जा सकती है। अब सरकार ने अपने आदेश जारी करते हुए ट्यूशन फीस को घटाकर 25 हजार कर दिया है। निजी कॉलेज बीएड एसोसिएशन के महासचिव वेद शर्मा का कहना है कि जब फीस स्ट्रक्चर तैयार किया तो उन्हें उस बैठक में नहीं बुलाया गया। ऐसे में कैसे अपनी मर्जी से ट्यूशन फीस को कम कर दिया।
छात्रों को मिलेगा फायदा
सरकारकी ओर से जो फीस कम की गई है या तय की गई है उसका छात्रों काे सीधा फायदा मिल रहा है, लेकिन कई बीएड कॉलेज एक लाख तक फीस छात्रों से ले चुके हैं। अब जो फीस स्ट्रक्चर आया है, उसके हिसाब से छात्रों को कॉलेज की ओर से फीस वापस करनी पड़ेगी। जबकि कॉलेज प्रबंधन फीस वापस करने से इनकार कर रहे हैं।
फीस स्ट्रक्चर के संबंध में सूचना की जा रही जारी
^जोफीस स्ट्रक्चर तय हुआ है, उसके हिसाब से ही फीस ली जा सकती है। सभी कॉलेजों को फीस स्ट्रक्चर से संबंधित अधिसूचना भेजी जा रही है। इसके बाद भी अधिक फीस ली गई या फिर ली गई फीस वापस नहीं ली तो कार्रवाई की जाएगी। प्रो.राजेंद्र चौहान, प्रो वीसी एचपीयू
टयूशन फीस को कम करेंं
दोवर्ष की बीएड होने से निजी बीएड कॉलेजों में पहले से ही सीटों को भरने का संकट बना हुआ है। ऐसे में बीएड कॉलेज संचालक चाहते है कि अब टयूशन फीस को कम किया जाए। ऐसे में यदि फीस कम होती है तो कॉलेज को चलाना मुश्किल हो जाएगा। छात्रों को कॉलेज प्रबंधन जो फीस मांग रहे हैं, उन्हें देनी ही पड़ रही है। अभी तक फीस से संबंधित नोटिफिकेशन कॉलेजों में नहीं पहुंची है।
एजुकेशन रिपोर्टर | शिमला
सरकारद्वारा फीस स्ट्रक्चर तय करने के बाद अब प्रदेश के 72 निजी बीएड कॉलेज इसके विरोध में गए हैं। जबकि छात्रों ने कॉलेजों में पहले अधिक फीस दी थी, जिसे अब वह वापस मांग रहे हैं। ऐसे में सोमवार को कुछ छात्र विवि पहुंचे। यहां पर छात्रों ने प्रो. वीसी को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद प्रो. वीसी प्रो. राजेंद्र चौहान ने सभी निजी बीएड कॉलेजों को फीस से संबंधित नोटिफिकेशन जारी करने के आदेश दिए हैं। इससे पहले फीस तय होने के कारण कई निजी बीएड कॉलेजों ने अधिक फीस छात्रों से ले ली। अब जब फीस तय हुई है, छात्र इसे वापस मांग रहे हैं। वहीं, निजी कॉलेज बीएड एसोसिएशन ने मामले में कोर्ट जाने का मन बनाया है। बीएड एसोसिएशन का कहना है कि बीएड टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ की सैलरी पर हर महीने में चार लाख रुपए से अधिक खर्च होते हैं। बीएड की ट्यूशन फीस के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हो सकती है। इसके बावजूद भी इस फीस को कम किया गया है। ट्यूशन फीस तीन साल बाद 10 फीसदी बढ़नी चाहिए। ट्यूशन फीस 35,750 से बढ़कर 40 हजार होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने इसे कम करके 25 हजार किया है। इससे पहले एक वर्ष की बीएड की फीस सरकार ने 46750 रुपए तय की थी। बीएड की डिग्री दो वर्ष की हो गई। अब सरकार के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने फीस स्ट्रक्चर बनाया और फीस 62870 रुपए तय की। जिसमें ट्यूशन फीस 35 हजार से घटाकर 25 हजार की गई है।