आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश के
उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश सरकार को झटका लगा है. नैक एक्रिडेशन
नहीं करवाने वाले कॉलेजों को अब रूसा की ग्रांट नहीं मिलेगी. हाल ही में
बैंगूलुरू में हुई नैक की बैठक में यह फैसला लिया गया है.
नैक यानी राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद
हर पांच साल में महाविद्यालयों में सुविधाओं का निरीक्षण कर उसे ग्रेड
प्रदान करती है. प्रदेश में 29 महाविद्यालय ऐसे हैं, जो नैक एक्रिडेटिड
नहीं है, जबकि 9 कॉलेजों ने दोबारा एक्रिडेशन के लिए आवेदन किया है.
जानकारी के अनुसार, 63 कॉलेज ऐसे हैं, जो अभी एक्रिडेशन के लिए योग्यता
नहीं रखते हैं. ऐसे में प्रदेश सरकार पर करोड़ों का और बोझ पड़ेगा.
जिन महाविद्यालयों के पास अपने भवन नहीं हैं या मूलभूत सुविधाओं की कमी है,
केवल उन्हें ही छूट दी जा सकती है. ग्रांट के लिए एक्रिडेशन लेना अनिवार्य
कर दिया गया है.
इस बैठक में सभी राज्यों के शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने हिस्सा लिया. हिमाचल से उच्चतर शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत
ने भाग लिया. शिक्षा विभाग ने नैक एक्रिडेशन के संबंध में जल्द ही
प्रधानाचार्यों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला लिया है.