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उधार के अध्यापकों के सहारे स्कूल

नेरवा : ऊपरी शिमला में यूं तो लगभग सभी स्कूलों में शिक्षकों का अभाव है परंतु कई स्कूल ऐसे भी हैं जिनमें या तो एक भी अध्यापक नहीं है या फिर स्कूल उधार के अध्यापकों के सहारे चल रहे हैं जोकि सरकार के बेहतर शिक्षा देने के दावों की खिल्ली उड़ा रहे हैं।
शिक्षकों के अभाव में कई स्कूलों में छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। ऐसे ही 2 स्कूल उपमंडल चौपाल की पौडिय़ा पंचायत में भी हैं। इन स्कूलों में अध्यापकों की कमी के चलते 150 के करीब छात्रों का भविष्य दांव पर है जिनमें से एक में एक भी अध्यापक नहीं है तो दूसरे में शिक्षकों के आधा दर्जन पद लंबे अरसे से खली पड़े हैं।

ग्राम पंचायत पौड़िया की प्रधान सूरजा चौहान ने बताया की माध्यमिक पाठशाला थियारा में इस समय एक भी अध्यापक नहीं है। बीते शैक्षणिक सत्र में यहां एक शास्त्री अध्यापिका तैनात थी परंतु 31 दिसम्बर को उसके सेवानिवृत्त होने के बाद स्कूल पूरी तरह शिक्षक विहीन हो गया है। इस स्कूल में शिक्षकों के पांचों पद रिक्त होने से यहां पढ़ाई कर रहे 20 छात्रों के भविष्य पर तलवार लटक गई है। छात्रों के अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताए जा रही है। कुछ छात्र तो स्कूल से पलायन भी कर चुके हैं।

पंचायत प्रधान सूरजा चौहान, उपप्रधान राम लाल, वार्ड सदस्य रीना देवी, एस.एम.सी. अध्यक्ष सतीश चौहान, अभिभावकों इंद्र सिंह, वीरेंद्र, मोहर सिंह, रविंद्र, नरेंद्र, रघुवीर, प्रदीप, प्रकाश, लायक राम, राकेश शर्मा, मेला राम व भूपेंद्र धोपटा आदि ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से गुहार लगाई है कि उक्त दोनों स्कूलों में रिक्त पड़े पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए।

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