नाहन (सिरमौर)। सीएंडवी वर्ग के 64 अध्यापकों को दो अग्रिम वेतनमान दिए
जाने के माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों को अभी तक लागू नहीं किया जा सका
है। इससे इस वर्ग के अध्यापकों में भारी रोष है।
प्रदेश हाईकोर्ट ने वर्ष
2012 में यह फैसला सुनाया था। करीब छह वर्ष का समय गुजर चुका है लेकिन यह
फैसला लागू नहीं हुआ। दुखद बात यह है कि मुख्य याचिकाकर्ता की मृत्यु तक हो
चुकी है, जिससे राजकीय सेवानिवृत्त अध्यापक संघ में प्रदेश में बनने वाली
सरकारों के खिलाफ नाराजगी है। संघ के महासचिव दलीप सिंह वर्मा, वेद प्रकाश,
लाल सिंह, देवी चंद, देवी सहाय शास्त्री, यशपाल कछावा, तेज बहादुर, स्नेह
दत्ता, स्नेह शर्मा, अशोक वर्मा, शूरवीर, बाबूराम, जागर सिंह, संतराम
शर्मा, प्रेम सागर, लायक राम, अश्मीर मोहम्मद, गोपाल सिंह, मीना सूद, फूल
चंद आदि ने बताया कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 1999 से अपना 20 साल का सेवाकाल
पूरा कर चुके सीएंडवी अध्यापकों को दो अग्रिम वेतनमान प्रदान किए थे लेकिन,
जो अध्यापक 1999 से पहले सेवानिवृत्त हुए उन 64 शिक्षकों को इस लाभ से
वंचित रखा गया। उन्होंने बताया कि इस मसले को लेकर अध्यापक इकबाल शेख और
अदर के नाम से अदालत में याचिका दायर की गई थी। उच्च न्यायालय ने 64
अध्यापकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए इस लाभ से वंचित अध्यापकों को तीन
माह के भीतर दो अग्रिम वेतनमान का लाभ देने का फैसला सुनाया था। दलीप सिंह
वर्मा ने बताया कि छह साल बीतने के बाद भी प्रदेश सरकार माननीय उच्च
न्यायालय के इस फैसले को लागू नहीं कर पाई है। जबकि, मुख्य याचिकाकर्ता
इकबाल मुहम्मद शेख सहित कई अध्यापकों की मृत्यु भी हो चुकी है। राजकीय
सेवानिवृत्त अध्यापक संगठन की जिला इकाई ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को
पत्र भेजकर मांग की कि वह माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते
हुए सभी अध्यापकों को दो अग्रिम वेतनमान का लाभ प्रदान करें।