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स्कूल प्रबंधन समितियों ने रख लिए अयोग्य शिक्षक

शिमला : कई सरकारी स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समितियों ने एसएमसी टीचर भर्ती में अपात्र एवं अयोग्य टीचर रख लिए हैं। इसकी जानकारी विभाग को तब लगी, जबकि ग्रांट इन एड न मिलने के कारण ये शिक्षक ट्रिब्यूनल और कोर्ट गए। अब उच्च शिक्षा निदेशक ने शनिवार को उन सभी प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों से जवाब तलब करने लिए पत्र भेजा है, जिनके स्कूलों में ये भर्तियां हुई हैं।


कुछ मंत्रियों के दबाव में जयराम सरकार ने एसएमसी शिक्षक भर्ती को पूर्व कांग्रेस सरकार की तरह बहाल कर दिया था। इसमें कई तरह की छूट देते हुए सरकार ने 16 फरवरी 2019 को भी उच्च और प्रारंभिक शिक्षा विभाग को पत्र भेजा था कि जिन ग्रामीण स्कूलों में जो पद पिछले 6 महीनों से खाली हैं, उन्हें एसएमसी पॉलिसी से भर लिया जाए। इसके लिए तय शैक्षणिक योग्यता के अनुसार डाक्यूमेंट वेरिफाई करने की जिम्मेदारी संबंधित स्कूल प्रिंसिपल या हेडमास्टर की थी।

लेकिन अपात्र शिक्षक रखे गए और जब इन्होंने अपना मानदेय मांगा तो विभाग को ग्रांट के लिए लिखा गया। लेकिन ग्रांट केवल आरएंडपी रूल्स के अनुसार रखे गए शिक्षकों को देय है। जब ये ग्रांट नहीं मिली तो ये शिक्षक कोर्ट चले गए। कोर्ट से नोटिस आने के बाद विभाग को पता चला कि ऐसी भी कोई भर्ती हुई है। इसके बाद अब शनिवार को उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी उपनिदेशकों, सभी प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों को पत्र जारी कर कहा है कि वे सभी मुखिया लिखित जवाब दें कि अपात्र शिक्षक क्यों भर्ती किए गए? इनकी ग्रांट भी रोक ली गई है।
छुट्टियों का शेड्यूल बदलने पर जवाब नहीं दे रहे उपनिदेशक

राज्य के स्कूलों में छुट्टियों का शेड्यूल बदलने के लिए सभी जिलों के तीनों उपनिदेशकों से उच्च शिक्षा निदेशालय ने राय मांगी थी। ये राय उपनिदेशक हायर, एलीमेंटरी और इंस्पेक्शन विंग ने शिक्षक संगठनों से बात कर अलग-अलग देनी थी। इसके लिए 23 जनवरी को सभी को पत्र भेजे गए थे। लेकिन अब तक बिलासपुर, कुल्लू, लाहौल, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों से कोई जवाब नहीं आया है। अब उच्च शिक्षा निदेशक ने यही जवाब 5 मार्च तक जमा करवाने का नोटिस उक्त जिलों को जारी किया है।

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