शिक्षकों के लिए नौकरी का सुनहरा मौका है. तेलंगाना स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन यानि कि TSPSC ने भारी संख्या में भर्तियां निकाली है. आवेदन प्रकिया 30 अक्टूबर से शुरू होगी और अंतिम तारीख 30 नवंबर, 2017 है.
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दो बार फीस जमा करवाने वाले अप्रशिक्षत शिक्षकों को राहत, फीस होगी रिफंड
अमर उजाला ब्यूरो
चंबा।
पहले एनआईओएस के तहत डीएलएड(डिप्लोमा इन एलिमेंटरी एजुकेशन) के लिए आवेदन
कर चुके ऐसे अप्रशिक्षित शिक्षक जो कोर्स के लिए तकनीकी कारणों से दो बार
फीस जमा करवा चुके हैं।
चुनावी ड्यूटी में तैनात अध्यापकों की सूची मांगी
चंबा। विस चुनावों को लेकर शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों से चुनावी ड्यूटी
में तैनात शिक्षकों का ब्योरा मांगा है। इसके लिए विभाग की ओर से सभी स्कूल
प्रभारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
शारीरिक शिक्षकों के पद भरने का वादा नहीं हुआ पूरा
जागरण संवाददाता, हमीरपुर : विधानसभा चुनाव प्रचार में लोगों के घरों
में दस्तक दे रहे नेताओं को उनके साथ किए वादों की याद दिला रहे हैं।
एचपीयू से अवकाश लेकर, निजी विवि में सेवाएं
एचपीयूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाला शिक्षक अब जब तक चाहे तब तक कहीं दूसरी
जगह अपनी सेवाएं दे सकता हैं। इस अजब गजब नियम के चलते तो एचपीयू को कोई
फायदा हो रहा है और ही छात्रों को पढ़ाने के लिए कोई विकल्प एचपीयू के पास
बचा हैं। यही, नहीं उक्त शिक्षक निजी यूनिवर्सिटी में अपनी सेवाएं देने के
बाद दोबारा से यूनिवर्सिटी में अपने पद पर ज्वाइन कर सकता हैं। ऐसे में
एचपीयू के इस अजब गजब नियम के कारण छात्रों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।
खास बात यह है कि शिक्षक जब तक चाहे तब तक अपनी सेवाएं प्राइवेट
यूनिवर्सिटी में दे सकता हैं। ऐसे में उनके पद को तो यूनिवर्सिटी प्रशासन
भर सकता हैं और ही उनके स्थान पर पढ़ाने के लिए किसी अन्य शिक्षक को रख
सकता हैं।
शिक्षकों की सेवाओं का विवि को कोई लाभ नहीं
अवकाशपर जाने वाले शिक्षकों की सेवाओं का एचपीयू को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। उल्टा यूनिवर्सिटी को इससे नुकसान हो रहा है। शिक्षकों के अनुभव का निजी यूनिवर्सिटियों को ही फायदा मिल रहा हैं। एचपीयू ने वर्ष 2014 में ऑर्डिनेंस में शिक्षकों चुनाव लड़ने को लेकर कई तरह के नियम लाए थे। जबकि शिक्षक के निजी यूनिवर्सिटी में सेवाएं देने बारे में किसी तरह के नियम में बदलाव नहीं किया गया हैं। ऐसे में छात्रों को इसका सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा हैं।
दो शिक्षक अभी अवकाश पर, निजी विवि में नौकरी
वर्तमानमें एचपीयू से दो शिक्षक अवकाश लेकर प्राइवेट यूनिवर्सिटी में नौकरी कर रहे हैं। इनमें से एक फिजिक्स विभाग के प्रो. महावीर सिंह हैं। ये वर्तमान में आईसी यूनिवर्सिटी बद्दी में बतौर वीसी कार्यरत हैं। इसी तरह डॉ. एसके बंसल महाराजा अग्रसेन यूनिवर्सिटी के वीसी पद पर सेवाएं दे रहे हैं। ये एचपीयू में एमटीए विभाग के निदेशक के पद पर तैनात थे।
इस तरह के नियम बनाए हैं
{एचपीयूमें पढ़ाने वाला शिक्षक किसी भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में डेपुटेशन पर जाकर पढ़ा सकता हैं।
{इसके लिए कोई लिमिट नहीं रखी हैं, जब तक शिक्षक चाहे निजी विवि में पढ़ा सकता हैं।
{एचपीयू उक्त शिक्षक को सैलरी नहीं देगा, जबकि जब वह यूनिवर्सिटी को फिर से ज्वाइन करता है तो सेवानिवृत अन्य तरह के सभी तरह के लाभ उसे मिलते हैं।
{शिक्षक की पोस्ट खाली रहती है। उनकी जगह किसी अन्य शिक्षक को नहीं रख सकते हैं।
{जिस विषय के वे शिक्षक हैं, उस विषय को पढ़ाने के लिए विवि के पास कोई विकल्प नहीं रहता हैं।
^शिक्षक अभी डेपुटेशन पर जा सकता हैं। हम मानते हैं इससे विवि को नुकसान हो रहा है। जबकि ये यूनिवर्सिटी की ओर से पहले ही तय किए गए नियम हैं। शिक्षक अवकाश लेकर ही किसी अन्य यूनिवर्सिटी में जाता हैं। इसके लिए उसे सैलरी नहीं मिलती हैं। जब वह दोबारा एचपीयू ज्वाइन करता हैं, तभी उसे लाभ मिलते हैं। प्रो.कंवलजीत सिंह, अध्यक्ष, शिक्षक संघ हपुटवा एचपीयू
^शिक्षकों के इस तरह से निजी यूनिवर्सिटी में डेपुटेशन पर जाने से स्टूडेंट को नुकसान होता हैं। कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए ऐसे कोई नियम नहीं है, जबकि शिक्षकों के लिए यह नियम बनाए गए हैं। ऐसे में विवि प्रशासन को इन नियमों में बदलाव करने चाहिए। तभी विवि में छात्रों को फायदा होगा। तेजरामशर्मा, अध्यक्ष, ऑफिसर एसोसिएशन एचपीयू
शिक्षकों की सेवाओं का विवि को कोई लाभ नहीं
अवकाशपर जाने वाले शिक्षकों की सेवाओं का एचपीयू को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। उल्टा यूनिवर्सिटी को इससे नुकसान हो रहा है। शिक्षकों के अनुभव का निजी यूनिवर्सिटियों को ही फायदा मिल रहा हैं। एचपीयू ने वर्ष 2014 में ऑर्डिनेंस में शिक्षकों चुनाव लड़ने को लेकर कई तरह के नियम लाए थे। जबकि शिक्षक के निजी यूनिवर्सिटी में सेवाएं देने बारे में किसी तरह के नियम में बदलाव नहीं किया गया हैं। ऐसे में छात्रों को इसका सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा हैं।
दो शिक्षक अभी अवकाश पर, निजी विवि में नौकरी
वर्तमानमें एचपीयू से दो शिक्षक अवकाश लेकर प्राइवेट यूनिवर्सिटी में नौकरी कर रहे हैं। इनमें से एक फिजिक्स विभाग के प्रो. महावीर सिंह हैं। ये वर्तमान में आईसी यूनिवर्सिटी बद्दी में बतौर वीसी कार्यरत हैं। इसी तरह डॉ. एसके बंसल महाराजा अग्रसेन यूनिवर्सिटी के वीसी पद पर सेवाएं दे रहे हैं। ये एचपीयू में एमटीए विभाग के निदेशक के पद पर तैनात थे।
इस तरह के नियम बनाए हैं
{एचपीयूमें पढ़ाने वाला शिक्षक किसी भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में डेपुटेशन पर जाकर पढ़ा सकता हैं।
{इसके लिए कोई लिमिट नहीं रखी हैं, जब तक शिक्षक चाहे निजी विवि में पढ़ा सकता हैं।
{एचपीयू उक्त शिक्षक को सैलरी नहीं देगा, जबकि जब वह यूनिवर्सिटी को फिर से ज्वाइन करता है तो सेवानिवृत अन्य तरह के सभी तरह के लाभ उसे मिलते हैं।
{शिक्षक की पोस्ट खाली रहती है। उनकी जगह किसी अन्य शिक्षक को नहीं रख सकते हैं।
{जिस विषय के वे शिक्षक हैं, उस विषय को पढ़ाने के लिए विवि के पास कोई विकल्प नहीं रहता हैं।
^शिक्षक अभी डेपुटेशन पर जा सकता हैं। हम मानते हैं इससे विवि को नुकसान हो रहा है। जबकि ये यूनिवर्सिटी की ओर से पहले ही तय किए गए नियम हैं। शिक्षक अवकाश लेकर ही किसी अन्य यूनिवर्सिटी में जाता हैं। इसके लिए उसे सैलरी नहीं मिलती हैं। जब वह दोबारा एचपीयू ज्वाइन करता हैं, तभी उसे लाभ मिलते हैं। प्रो.कंवलजीत सिंह, अध्यक्ष, शिक्षक संघ हपुटवा एचपीयू
^शिक्षकों के इस तरह से निजी यूनिवर्सिटी में डेपुटेशन पर जाने से स्टूडेंट को नुकसान होता हैं। कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए ऐसे कोई नियम नहीं है, जबकि शिक्षकों के लिए यह नियम बनाए गए हैं। ऐसे में विवि प्रशासन को इन नियमों में बदलाव करने चाहिए। तभी विवि में छात्रों को फायदा होगा। तेजरामशर्मा, अध्यक्ष, ऑफिसर एसोसिएशन एचपीयू
CBSE दो शिफ्ट में लेगा 10th-12th की परीक्षा
हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा को लेकर सीबीएसई जल्द ही एक बड़ा फैसला ले सकता है. इस सत्र से हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं अब दो पाली में कराई जा सकती हैं.
कंप्यूटर शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई टली, सरकार ने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में दिया ये स्पष्टीकरण
प्रशासनिक ट्रिब्यूनल
में कंप्यूटर शिक्षकों की हो रही भर्ती संबंधी मामले पर 31 अक्तूबर तक
सुनवाई टल गई है। इस मामले में प्रदेश सरकार ने जवाब दायर कर दिया है।
सरकार ने अपने स्पष्टीकरण में बताया कि भर्ती नियमों के अनुसार की जा रही
है।
कंप्यूटर शिक्षकों को राहत नहीं
विधि संवाददाता। शिमला प्रशासनिक ट्रिब्यूनल द्वारा कंप्यूटर शिक्षकों की हाल ही में हो रही भर्ती
पर रोक के पश्चात सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने प्रार्थियों को
सरकार के जवाब का प्रति उत्तर देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया।
आठ लाख शिक्षकों की हैप्पी होगी दिवाली, सरकार ने दिया 7वें वेतन आयोग का तोहफा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों
के शिक्षकों को दिवाली तोहफा दिया है। इन शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग का
लाभ दिया जाएगा। इन संस्थानों में काम करने वाले करीब आठ लाख से ज्यादा
शिक्षकों और दूसरे कर्मचारियों को अब हर महीने 22 से 28 फीसद तक बढ़ा हुआ
वेतन मिलेगा।
'क्या आप उच्च शिक्षा के हाल से चिंतित है?' रवीश कुमार के साथ प्राइम टाइम
उच्च शिक्षा की हालत ख़राब नहीं है, उनकी ख़राब है जो उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज गए. छात्रों को एक जगह जमा कर बर्बाद करने का प्रोजेक्ट सरकारें ही चला सकती हैं.
हजारों शिक्षकों को सरकार ने दिया ‘झटका’, कारण जानने के लिए पढ़े पूरी खबर
शिमला : निजी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हजारों शिक्षकों
को सरकार ने करारा झटका दिया है। दरअसल, 1100 शिक्षकों ने एनआईओएस के
पोर्टल पर अधूरी जानकारी देकर पंजीकरण करवाया है। जिसके चलते डिप्लोमा इन
एलीमेंटरी करने के लिए भरे गए शिक्षकों के फॉर्म रिजेक्ट कर दिए है।
कई शिक्षक नहीं जानते, कैसे करवाई जाए ऑनलाइन टीचिंग
हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला कई शिक्षक नहीं जानते हैं कि ऑनलाइन टीचिंग कैसे की जाए। इसके मद्देनजर
अब शिक्षकों की स्पेशल कंप्यूटर क्लासिज लगाई जाएंगी। उच्च शिक्षा निदेशक
ने शिक्षकों को ऑनलाइन टीचिंग के बेसिक सीखने के आदेश जारी कर दिए हैं।
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